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J&K: जोजिला सुरंग की खोदाई का 40% से ज्यादा काम पूरा, आज संसदीय सलाहकार समिति करेगी दौरा

Mon, 10 Apr 2023 10:24 AM IST
kumar गुलशन कुमार अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर

सार

जोजिला सुरंग श्रीनगर-कारगिल-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग पर 11,578 फुट की ऊंचाई पर जोजिला दर्रे के माध्यम से रणनीतिक महत्व की है, क्योंकि सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण राजमार्ग बंद रहता है।
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जोजिला रोड टनल - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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कश्मीर घाटी और लद्दाख क्षेत्र के बीच हर मौसम में संपर्क कायम रखने वाली रणनीतिक जोजिला सुरंग का काम तेज गति से जारी है और 40 फीसदी से ज्यादा खोदाई हो चुकी है। कंपनी के अनुसार दिसंबर 2026 तक इस परियोजना के पूरा होने की उम्मीद है। वहीं, सोमवार को केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के नेतृत्व में संसदीय सलाहकार समिति दौरा कर परियोजना की स्थिति का जायजा लेगी।

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यह सुरंग श्रीनगर-कारगिल-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग पर 11,578 फुट की ऊंचाई पर जोजिला दर्रे के माध्यम से रणनीतिक महत्व की है, क्योंकि सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण राजमार्ग बंद रहता है। इससे लद्दाख क्षेत्र कश्मीर से कट जाता है। सिंगल-ट्यूब जोजिला सुरंग मध्य कश्मीर के गांदरबल जिले में बालटाल से लद्दाख के कारगिल जिले के द्रास शहर में मिनिमर्ग तक 18 किमी की पहुंच सड़क के साथ 13 किमी लंबी है।

यह केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजना है। सोनमर्ग से मिनिमर्ग तक की परियोजना की कुल लंबाई 31 किमी है। सोनमर्ग से बालटाल तक यह 18 किमी है और फिर बालटाल से मिनीमार्ग तक की मुख्य सुरंग 13 किमी है। मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के प्रोजेक्ट हेड हरपाल सिंह ने बताया कि दोनों परियोजनाओं पर तेजी से काम चल रहा है। 
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एमइआइएल सुरंग का निर्माण कर रही है। जनवरी में हुए हिमस्खलन के कारण सर्दियों में दो महीने के लिए काम रोकना पड़ा है। इस दौरान दो लोगों की मौत हो गई थी और निर्माण कंपनी के करीब 38 उपकरण बर्फ के नीचे दब गए थे, जिन्हें अभी तक निकाला नहीं जा सका है। उम्मीद है कि परियोजना दिसंबर 2026 तक पूरी हो जाएगी। 13 किमी लंबी सुरंग में से कुल 6 किमी की कटिंग की गई है। शेष कार्य समय पर पूरा कर लिया जाएगा।

न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड से हो रहा सुरंग का निर्माण

प्रोजेक्ट हेड ने बताया कि सुरंग का निर्माण न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड से हो रहा है। इस तकनीक का इस्तेमाल करने से दुर्घटनाओं की संभावना बहुत कम होती है और सुरंग बनाने की गुणवत्ता व गति बहुत अच्छी होती है। यह यूरोप और उत्तरी अमेरिका में लागू एक विशेष तकनीक है। 

सोनमर्ग में जेड-मोड़ टनल से बालटाल तक कुल 31 किमी के प्रोजेक्ट में से 18 किमी का अप्रोच रोड है और साथ-साथ काम भी चल रहा है। इस पर करीब 60 फीसदी काम पूरा हो चुका है। चार पुल ऐसे हैं जिन पर करीब 80 फीसदी काम पूरा हो चुका है। पांच किमी लंबी नीलगढ़ सुरंगें हैं, जो पूरी हो चुकी हैं। काम अग्रिम गति से चल रहा है और दो साल के भीतर संपर्क मार्ग चालू हो जाएगा।
सेना चौबीसों घंटे कर सकेगी आवाजाही

सिंह ने कहा कि टनल का अप्रोच रोड बनने से लोगों को सर्दियों में भी बालटाल आने में कोई परेशानी नहीं होगी। सुरंग के पूरा होने के बाद सेना चौबीसों घंटे आवाजाही कर सकेगी। बर्फबारी के कारण सड़क चार महीने तक बंद रहती है। 

यह बहुत लंबा समय है। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लोग पूरे साल आवाजाही कर सकते हैं। इससे न केवल दूरी कम होगी बल्कि लगने वाला समय भी बहुत कम होगा। यह दूरी चार घंटे के बजाय 40 मिनट से भी कम समय में तय की जाएगी।

केंद्रीय मंत्री के नेतृत्व में सलाकार समिति आज करेगी दौरा

यह सुरंग एशिया में सबसे अधिक ऊंचाई पर सबसे लंबी सुरंग होगी। यंग हिमालयन रेंज में कई चुनौतियां हैं, लेकिन मुख्य चुनौती सुरंग के बाहर है। पहले दो साल हमने सर्दियों के महीनों में भी काम किया, लेकिन पिछले साल हिमस्खलन के कारण दो महीने रुकना पड़ा। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के नेतृत्व में सड़क परिवहन और राजमार्ग पर संसदीय सलाहकार समिति सोमवार को परियोजना स्थल का दौरा कर रही है।
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- संजय शर्मा, साइट प्रभारी, एमइआइएल।

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