तीन दिवसीय सांकरी मेले के अंतिम दिन रविवार को श्रद्धालुओं की काफी भीड़ रही। छुट्टी का दिन होने के कारण मेले में लंगर की विशेष व्यवस्था की गई। तीन दिनों में पचास हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने इस मेले में भाग लिया। जिला प्रशासन की तरफ से भी मेले के आयोजन के लिए विशेष प्रबंध किए गए थे।
मेले में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं। आस्था के इस मंदिर में महिलाओं व बच्चों ने भी बढ़-चढ़कर भाग लिया। प्रकृति की आगोश में आयोजित इस मेले में रंगारंग कार्यक्रम पेश किए गए। सहायक जिला उपायुक्त विकास शर्मा मुख्य अतिथि के तौर पर मौजूद थे। उनके साथ जिला प्रशासन की सारी टीम थी।
मेले में लगे स्टाल का निरीक्षण किया गया। बच्चों के खिलौने व अन्य सामान की भी खूब खरीददारी हुई। मेले में पहाड़ी परंपरा खूब देखने को मिली और बच्चों ने भी इसका खूब लुत्फ उठाया। हालांकि, मेले में पहुंचने के दौरान लोगों को खराब सड़क से काफी दिक्कतें हुईं। लोग टूटी हुई सड़कों से पैदल ही मेले में शामिल होने के लिए पहुंचे। कई लोग नंगे पांव कतारों में खडे़ देखे गए।
मेले में सेरीकल्चर, कृषि, हार्टिकल्चर, पशुपालन विभाग ने अपने स्टाल लगाए थे। प्रशासन ने इन स्टालों का निरीक्षण किया। दूरदराज पहाड़ी गांवों से आए लोगों ने डुग्गर संस्कृति की झलक देखी। शाम तक श्रद्धालुओं की भीड़ रही। मेले में तहसीलदार, ब्लाक विकास अधिकारी आदि मौजूद रहे।