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रिफ्यूजियों को मोदी जल्द देंगे तोहफा

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उप मुख्यमंत्री डाक्टर निर्मल सिंह ने कहा है कि भाजपा ने पीओके रिफ्यूजियों से जो वादे किए हैं, उनको हर हाल में पूरा किया जाएगा। सरकार ने रिफ्यूजियों के लिए पैकेज तैयार कर लिया है और पैकेज प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंच चुका है।
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नवंबर के पहले सप्ताह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब राज्य में आएंगे तो उम्मीद है कि इसका एलान कर दिया जाएगा। एमजेआर-47 की तरफ से जम्मू क्लब आडिटोरियम में शहीद पीओके रिफ्यूजियों की याद में आयोजित सेमिनार में उपमुख्यमंत्री ने कहा कि विडंबना है कि 68 वर्ष से रिफ्यूजियों को मौलिक अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ने पड़ रही है।

यह 1947 की राजनीति पर कई तरह के प्रश्न चिन्ह खड़े करता है। रिफ्यूजियों के मुद्दों पर राज्य सरकार वचनबद्ध है। नवंबर के पहले सप्ताह में प्रधानमंत्री द्वारा रिफ्यूजियों के पैकेज के एलान करने की पूरी उम्मीद है।
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यह पैकेज 1965, 1971 के रिफ्यूजियों के लिए भी होगा। भाजपा सरकार राज्य में एक मिशन के साथ काम कर रही है। समारोह के विशेष अतिथि एमएलसी चरणजीत सिंह खालसा ने कहा कि वह भी एक पीओके रिफ्यूजी है और उनको रिफ्यूजियों के दर्द का अहसास है। रिफ्यूजियों की चार पीढ़ियां विस्थापन का दर्द झेल रही है।

 रिफ्यूजियों को जमीन भी अपने खर्चे पर खरीदनी पड़ी है। उनको पूरी उम्मीद है कि भाजपा सरकार रिफ्यूजियों को उनका हक दिलाने में कामयाबी होगी।
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हमले का दर्द किया बयां

सेमीनार में एमजेआर-47 के संयोजक जेएस सूदन समेत कई पदाधिकारियों ने 1947 में पाकिस्तान की तरफ से किए गए हमले का दर्द का बखान किया। जेएस सूदन ने बताया कि इस हमले में 40 हजार से ज्यादा लोगों ने जान गवाई थी।

भाजपा महासचिव डा. नरेंद्र सिंह ने कहा कि 1947 में किसकी गलती से हमला हुआ था। यह सच्चाई सबके सामने आनी चाहिए। 5300 परिवार ऐसे हैं जोकि वर्तमान समय में दूसरे राज्यों में रह रहे हैं। 

एमजेआर-47 के पदाधिकारियों ने मांग की कि 1947 के हमले में मारे गए 40 हजार शहीदों की याद में एक मेमोरियल बनना चाहिए। इस पर उपमुख्यमंत्री ने संस्था के सदस्यों ने कहा कि शहीदों की सूची तैयार करें और सरकार को पत्र भेजें।

सरकार जमीन उपलब्ध करवाने का हर संभव प्रयास करेगी। सेमिनार में बाहरी राज्यों में रह रहे 5300 परिवार के सदस्यों के स्टेट सब्जेक्ट के मामले पर उपमुख्यमंत्री ने कहा कि यह परिवार जम्मू कश्मीर राज्य के निवासी हैं।

इनको राज्य में आकर स्टेट सब्जेक्ट के लिए आवेदन करना चाहिए। रिफ्यूजियों ने बताया कि सरकारी आंकड़े के अनुसार रिफ्यूजियों की संख्या 31619 हैं, लेकिन सरकार के पास यह जानकारी नहीं है कि यह परिवार कहां हैं।

9500 परिवार ऐसे हैं, जिनका अभी तक रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ है। रिफ्यूजियों के लिए सरकार को एक नोडल आफिसर नियुक्त करना चाहिए, जोकि रिफ्यूजियों का पूरा रिकार्ड तैयार करे।
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