भाजपा और पीडीपी के संबंधों की खटास अब मिटने लगी है। मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण के तुरंत बाद ही मुफ्ती द्वारा कश्मीर में शांतिपूर्ण और भारी मतदान के लिए अलगाववादियों, पाकिस्तान और आतंकियों को श्रेय देने के बाद से ही दोनों दलों में खिंचाव पैदा हुआ था।
बाद में अलगाववादी मसर्रत आलम की रिहाई ने आग में घी डालने का काम किया। इन घटनाक्रम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद के बीच सैद्धांतिक मतभेद की एक दीवार खड़ी कर दी थी। पर पहाड़ों की तरह रिश्तों पर जमी बर्फ भी अब पिघलने लगी है और मुफ्ती को मोदी ग्रेट स्टेटसमैन नजर आने लगे हैं।
मुफ्ती पहले सिर्फ पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के लिए ही ग्रेट स्टेटसमैन की संज्ञा का इस्तेमाल किया करते थे। अब वह जगह मोदी ने ले ली है। जम्मू स्थित अपने सरकारी आवास पर पत्रकारों से बातचीत में मुफ्ती सीधे तौर पर मोदी की तुलना वाजपेयी से करने से बचते रहे, लेकिन, उन्होंने कहा कि मोदी की सोच बड़ी है।
मोदी की दूरदर्शिता को दर्शाता है ये फैसला
वाजपेयी के कार्यकाल में भी मुफ्ती रियासत के मुख्यमंत्री थे। उन दिनों को याद करते हुए मुफ्ती कहते हैं कि तब संसद पर हमला भी हुआ और देश ने कारगिल का युद्ध भी झेला। इसके बावजूद वाजेपयी ने संयम से काम लेते हुए पाकिस्तान से युद्ध की स्थिति टाली।
क्रास एलओसी ट्रेड को बढ़ावा दिया और पाकिस्तान के लिए बस सेवा भी शुरू की। तब वाजपेयी ने कहा था कि हम अपना पड़ोसी नहीं बदल सकते इसलिए पड़ोसी से बेहतर रिश्ते जरूरी हैं। मुफ्ती ने कहा कि मोदी बड़ी सोच वाले और बड़े कैनवास के राजनेता हैं।
पीडीपी से गठबंधन का मोदी का निर्णय भी उनकी दूरदर्शिता को दर्शाता है। मोदी चाहते हैं कि लोगों को बुलेट पर नहीं बल्कि बैलेट पर भरोसा हो। वह इसके लिए काम करना चाहते हैं। वह जन आकांक्षाओं के हिसाब से विकास चाहते हैं।
मोदी के दिमाग में है बड़ी तस्वीर
मुफ्ती ने कहा कि मोदी के दिमाग में कश्मीर को लिए कोई बड़ी तस्वीर है तभी उन्होंने पीडीपी से गठबंधन किया है। जब कोई किसी विजन के लिए बड़े कैनवास पर काम करता है तो उसका उद्देश्य भी बड़ा होता है। मोदी की विदेश नीति की सराहना करते हुए मुफ्ती कहते हैं कि चीन दौरे से देश में निवेश बढ़ेगा।
मोदी का फोकस पड़ोसियों को करीब लाने पर है। उन्होंने अपने शपथ ग्रहण समारोह में पड़ोसी देशों (सार्क) के राष्ट्राध्यक्षों को आमंत्रित किया। ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था। मोदी चीन के अलावा जापान, श्रीलंका, कनाडा और नेपाल गए।
यह बदलाव के माहौल को दर्शाता है। चीन से अब व्यापार अमरीका की तुलना में ज्यादा होगा। उन्होंने पाकिस्तान के साथ संबंधों को सुधारने में मोदी की पहल को भी स्वागत योग्य बताया।