राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री व नेकां के उप प्रधान उमर अब्दुल्ला ने कहा कि भाजपा बाबरी मस्जिद, राम मंदिर, अनुच्छेद 370, 35 ए जैसे संवेदनशील मुद्दों का चुनावों के दौरान वोट बैंक के लिए इस्तेमाल करती रही है। केंद्र की सत्ता में नरेंद्र मोदी की सरकार को चार साल हो गए हैं, लेकिन ऐसे किसी भी मुद्दे का हल क्यों नहीं निकाला गया। बदकिस्मती से भाजपा अवाम के जज्बात से खेलती आई है। रियासत में नेकां फिलहाल चुनाव के हक में नहीं है। लेकिन विधानसभा को भंग करके खरीद फरोख्त की अफवाहों पर अंकुश लगाई जाए।
डाग बंगला अनंतनाग (कश्मीर) में सोमवार को पार्टी की दक्षिणी जोन की बैठक में उमर ने कहा कि अनुच्छेद 370 और 35ए का मामला सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है। गर्मियों की छुट्टियों के बाद इस पर कुछ होता है तो सियासी तौर पर देखा जाएगा। राज्य में वर्ष 2014 से सत्ता में रही भाजपा-पीडीपी की गठबंधन सरकार भ्रष्टाचार, कुशासन और घोटाले करने में सफल रही है। इस सरकार के कार्यकाल में हुए कई फैसलों पर दोबारा सोचने की जरूरत है। इसके लिए नेकां ने राज्यपाल से गुजारिश की है। उन्होंने आरोप लगाया कि झेलम की साफ सफाई और उसे दुरुस्त करने के लिए आई धनराशि का सही प्रयोग नहीं किया गया, जिसकी जांच करवाई जाए। 2014 की बाढ़ के बाद 90 हजार करोड़ के पैकेज पर क्या हुआ। गत दिनों की बारिश ने ही बाढ़ से निपटने की तैयारियों की पोल खोल दी है।
गुलाम नबी की बातों पर ध्यान दिया जाना चाहिए
उमर ने कहा कि रियासत से कांग्रेस में गुलाम नबी आजाद सबसे वरिष्ठ नेता हैं, जब उन्होंने पीडीपी-कांग्रेस गठबंधन में किसी भी गुंजाइश से इंकार कर दिया है तो अफवाहों को तवज्जो नहीं दी जानी चाहिए। महबूबा मुफ्ती दक्षिण कश्मीर में छोड़ी अपनी ही सीट पर चुनाव नहीं करवा पाईं। नेकां ने सत्ता की भूख के लिए कभी भी अपने सिद्धांतों और नैतिक मूल्यों के साथ समझौता नहीं किया है। पार्टी सभी अहम मुद्दों के लिए आंतरिक स्वायत्तता के पक्ष का समर्थन करती है।