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मोबाइल गेम्स के नाम पर जुआ, लत बन रही जानलेवा

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जम्मू। मोबाइल की लत बच्चों से लेकर युवा वर्ग तक को खोखला कर रही है। हालात यहां तक पहुंच गए हैं कि मोबाइल पर खेली जाने वाली गेम्स को जुए के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है। इसी के चलते बच्चों के दिमाग में कई तरह की बुरी आदतें भी उत्पन्न हो रही हैं और वह आपराधिक रास्तों पर चल रहे हैं। मोबाइल की लत जानलेवा बन चुकी है।
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एक 14 साल का बच्चा अपने साथी को इसलिए मार देता है कि उसे उसका मोबाइल फोन चाहिए। मोबाइल किसलिए चाहिए, अपने दोस्तों के साथ गेम्स खेलने के लिए। गेम क्यों खेलनी है, पैसों के लिए। बात जान लेने तक ही सीमित नहीं। जान लेने के बाद दिमाग में यह सब भी आया कि अब इसका चेहरा बिगाड़ देता हूं, ताकि किसी को पता न चले।
सवाल यह उठता है कि एक 14 साल के बच्चे के दिमाग में ऐसी बातें कैसे आ गईं। आखिर किसने उसे कातिल बना दिया। जानकारी के अनुसार इस समय मोबाइल पर लूडो गेम जमकर खेला जा रहा है। छोटे-छोटे बच्चे तक इसका इस्तेमाल कर रहे हैं। 100 रुपये से शुरू होने वाली गेम्स हजारों रुपये तक आ जाती है। बच्चे अपना जेब खर्च गेम्स में खर्च कर देते हैं।
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क्यों हो रहा ऐसा
से 18 साल तक की आयु बच्चों के विकास की होती है। हम उनको जिस ओर लेकर जाएंगे, वो उसी ओर चल पड़ेंगे। मोबाइल पर पबजी गेम्स चली। यह गेम बच्चों को अग्रेसिव बनाती है। इसी तरह से कई और गेम्स हैं, जो बच्चों को अग्रेसिव बनाती हैं। इसी अग्रेशन की वजह से बच्चे ऐसा करते हैं, जो उन्हें अपनी जान पर भी मजबूर कर सकता है और किसी दूसरे की जान लेने पर भी।
बच्चों को सीधे तौर पर मोबाइल का इस्तेमाल न करने दें
ऐसे मामलों में मां-बाप की निगरानी बहुत अहम है। 18 साल से कम बच्चों को मोबाइल फोन मत दें। यदि उनको मोबाइल देना भी है, तो अपना मोबाइल फोन दें, ताकि कुछ देर के लिए वो उसे चला सकें। चलाने के बाद भी मोबाइल में देखें कि बच्चा क्या कर रहा था। साथ ही स्कूल के शिक्षकों की भी जिम्मेदारी है कि बच्चों को मोबाइल से दूर रहने का पाठ पढ़ाएं।
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-डॉ. जगदीश थापा, मनोचिकित्सक
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