प्रौढ़ शिक्षा के लिए भारत साक्षरता मिशन का कठुआ शहर में शनिवार को आगाज हो गया। शिक्षा विभाग द्वारा मिशन के लिए तैनात प्रशिक्षकों का गर्ल्स हायर सेकेंडरी स्कूल परिसर में प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया।
इस अवसर पर प्रशिक्षुओं को मिशन और लक्ष्य के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। प्रशिक्षण कार्यक्रम के साथ ही मिशन का फील्ड सर्वे भी शुरू कर दिया गया है।
साक्षर भारत मिशन के क्लस्टर रिसोर्स पर्सन सुनील सिंह जसरोटिया ने बताया कि यह मिशन केंद्रीय सरकार ने वर्ष 2008 में शुरू किया गया था लेकिन जम्मू कश्मीर में किन्ही कारणों से मिशन को इस वर्ष से शुरू किया जा रहा है।
पंद्रह से अस्सी वर्ष के आयु वर्ग को इस मिशन के तहत कवर किए जाने का लक्ष्य है। मुख्य तौर पर तीन बिंदुओं पर मिशन का कार्य अंजाम दिया जाएगा।
इसमें सबसे पहला साक्षरता का लक्ष्य है जिसके साथ शिक्षा और कौशल विकास की गतिविधियों को अंजाम दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि ग्राम पंचायत स्तर पर दो दो प्रेरक नियुक्त किए गए हैं।
यह प्रेरक टारगेट ग्रुप को मिशन के तहत शिक्षित और कुशल बनाने का प्रयास करेंगे। इसके अलावा केंद्रीय सरकार की मदद से स्कूली शिक्षा छोड़ चुके बच्चों को फिर से शिक्षा के साथ जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।
बच्चों की उनके स्तर के अनुसार परीक्षा ली जाएगी और बाकायदा उन्हें सर्टिफिकेट दिया जाएगा तो स्कूली शिक्षा के सर्टिफिकेट के समकक्ष ही माना जाएगा। इस लिहाज से साक्षर भारत मिशन बेहद महत्वपूर्ण है।