सीमा पर तनावपूर्ण हालात और सुविधाओं का अभाव झेलने वाले इलाकों से पलायन रोकने के लिए जिला प्रशासन विशेष अभियान तेज करने जा रहा है।
मिशन हिफाजत के तहत सीमा से सटे गांवों में बुनियादी सहूलियतें फरहाम कर पलायन रोकने का प्रयास किया जाएगा।
अपनी तरह के अनोखे इस कार्यक्रम में पहले चरण में पांच गांवों का चयन किया गया है जिन्हें आदर्श गांव की तर्ज पर विकसित किया जाएगा।
सीमावर्ती इलाके में गोलाबारी शुरू होने से पूर्व इस बाबत कवायद शुरू होने वाली थी, लेकिन तनावपूर्ण माहौल में कार्यक्रम ठंडे बस्ते में चला गया। प्रशासन ने अब नए सिरे से इस कार्यक्रम को अंजाम देने की तैयारी कर ली है।
आईपी से पांच किलोमीटर में 57 गांव
दरअसल भारत-पाकिस्तान अंतर्राष्ट्रीय सीमा से पांच किलोमीटर के दायरे में कुल 57 गांव पड़ते हैं। हजारों की आबादी वाले इस संवेदनशील इलाके में गोलाबारी का डर तो बना ही रहता है, साथ ही बुनियादी सुविधाओं के लिहाज से भी हालात संतोषजनक नहीं हैं।
यही वजह है कि सीमावर्ती इलाके से गाहे बगाहे पलायन होता रहता है। जिला प्रशासन ने बॉर्डर एरिया डेवलपमेंट प्लान सहित राज्य और केंद्रीय सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ पांच गांवों में प्राथमिकता से फरहाम करने का लक्ष्य रखा है।
इन गांवों में पानी, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य, खाद्य आपूर्ति, बायो गैस प्लांट आदि सुविधाएं दी जाएंगी।
गोलीबारी के चलते रोकी गई थी योजना
पांच चयनित गांवों को हर तरह से आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जाएगा। जिला उपायुक्त कठुआ डॉ. शाहिद इकबाल चौधरी के अनुसार पांच गांवों का चयन किया गया है, जिनके नाम फिलहाल सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
सरकारी योजनाओं का हर संभव लाभ देकर गांवों को आत्मनिर्भर बनाया जाएगा, ताकि पलायन की चुनौती से निपटा जा सके।
सीमावर्ती इलाके में हालात बिगड़ने की वजह से कार्यक्रम को स्थगित किया गया था, लेकिन आदर्श गांव विकसित करने का लक्ष्य चालू वित्तीय वर्ष के अंत तक पूरा कर लिया जाएगा।