सुभाष को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें किश्तवाड़ जिला अस्पताल स्थानांतरित किया गया। नायब तहसीलदार सुषील कुमार ने बताया कि उनकी चोटें गंभीर नहीं हैं, इसलिए उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया है।
स्थानीय लोग सुभाष के बचने को ईश्वरीय कृपा मान रहे हैं और कहते हैं कि उनकी लंगर सेवा का फल उन्हें मिला है।
14 अगस्त को मूसलाधार बारिश और अचानक आई बाढ़ ने चिशोती गांव में तबाही मचा दी। करीब 12:25 बजे आयी इस प्राकृतिक आपदा में कम से कम 60 लोगों की मौत हो चुकी है और 100 से ज्यादा घायल हुए हैं। अभी भी 82 लोग लापता हैं, जिनमें ज्यादातर तीर्थयात्री हैं।
बाढ़ ने लंगर, एक अस्थायी बाजार, सुरक्षा चौकी, 16 मकान, तीन मंदिर, चार पानी की चक्कियां, 30 मीटर लंबा पुल और कई वाहन तबाह कर दिए। मचैल माता की सालाना यात्रा, जो 25 जुलाई से शुरू हुई थी, 5 सितंबर तक चलनी थी, पर अब तीसरे दिन भी स्थगित है।
चिशोती से 8.5 किलोमीटर का कठिन रास्ता 9,500 फीट ऊंचाई पर स्थित मछैल माता मंदिर तक जाता है, जो किश्तवाड़ शहर से लगभग 90 किलोमीटर दूर है।