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जम्मू कश्मीर के फारूक खान पर क्यों मेहरबान है भाजपा?

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जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद से लोहा लेने वाले बहादुर पुलिस अधिकारी रहे पूर्व पुलिस महानिरीक्षक फारूक खान 26 मार्च, 2014 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हीरानगर रैली में भाजपा में शामिल हुए और लगातार पार्टी का विश्वास जीतकर अब देश में भाजपा की अग्रिम पंक्ति के नेताओं में शुमार हो गए हैं।
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पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने उनकी क्षमताओं को देखते हुए खान को भाजपा के अल्पसंख्यक राष्ट्रीय मोर्चा का प्रभारी बनाने के साथ-साथ उन्हें नगालैंड का प्रभार सौंपा है।

जन संघ की पृष्ठभूमि से संबंधित रहे फारूक खान की अगुवाई में सुरक्षा बलों  ने मार्च, 1996 में कश्मीर में अति चर्चित रहे हजरत बल श्राइन पर कब्जा जमाए बैठे 18 आतंकवादियों को मार गिराया था और सात विदेशी आतंकवादियों को इस आपरेशन में गिरफ्तार किया गया था।
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2014 में भाजपा में शामिल हुए थे खान

2003 में जम्मू के ऐतिहासिक रघुनाथ मंदिर पर आतंकी हमले को भी फारूक खान की अगुवाई में सुरक्षा बलों ने नाकाम करते हुए सभी आतंकवादियों को मार गिराया था।

सेवानिवृत्त होने के बाद 2014 में भाजपा में शामिल हुए खान ने लोकसभा चुनाव के बाद जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव में भी भाजपा के लिए शानदार काम किया और अल्पसंख्यकों को भाजपा के करीब लाने में भूमिका निभाकर पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की आकांक्षाओं पर खरे उतरते चले गए।

भाजपा के नवनियुक्त अल्पसंख्यक मोर्चा और नगालैंड के प्रभारी फारूक खान रविवार पांच जुलाई को नई दिल्ली से जम्मू पहुंचेंगे। फारूक खान ने ‘अमर उजाला’ से बातचीत में कहा कि भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व ने उन्हें जो भी जिम्मेदारी सौंपी है, उस पर वह खरे उतरने के लिए पूरी ईमानदारी से काम करेंगे।

उनका कहना है कि अल्पसंख्यक वर्ग भाजपा के करीब आ रहा है और पार्टी की नीतियां और कार्यक्रम देश हित के अलावा देश के हर धर्म और हर वर्ग के हित में है। उनका कहना है कि वह नगालैंड में तो कभी नहीं रहे हैं, लेकिन पार्टी ने जो काम दिया है, उस पर वह काम करने और भाजपा को और बढ़ाने के लिए काम करने को तैयार है।
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