प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भले ही मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद के उस बयान से किनारा कर लिया हो, जिसमें उन्होंने भारी मतदान का श्रेय अलगाववादियों, पाकिस्तान और आतंकियों को दिया था, लेकिन सुशासन के लिए मुफ्ती ने मोदी शैली अपनाने के संकेत दिए हैं।
मुफ्ती ने मोदी की तरह अपने मंत्रियों से साफ कह दिया है कि वह सचिवालय के अपने दफ्तरों में रिश्तेदारों के लिए जगह नहीं बनाएं। इस निर्देश के बाद अब कोई मंत्री अपने रिश्तेदारों को निजी सचिव, ओएसडी या पीआरओ नहीं बना सकेंगे। मुफ्ती ने उदाहरण पेश करते हुए अपने लिए नियुक्त पीआरओ को उनके मूल विभाग में भेज दिया है।
मंत्रियों को अपनी छवि के प्रति सतर्क रहने को कहा गया है। मंत्री अपने दफ्तरों में अफसरों को बुलाकर जरूरी कामकाज निपटाते रहे हैं। मुफ्ती ने इस बाबत भी निर्देश दिए हैं कि यह प्रथा बदलनी चाहिए।
सूत्रों के मुताबिक सूचना विभाग के एक अधिकारी को मुख्यमंत्री का पीआरओ बनाया गया था लेकिन जब मुफ्ती को पता चला कि उक्त अधिकारी उनके परिवार के किसी व्यक्ति का रिश्तेदार है तो सीएम ने अधिकारी को उनके मूल विभाग में वापस भेजने को कहा।