सेना के तीनों अंगों के जवान जल तांडव से तबाह हुए श्रीनगर में फंसे लाखों लोगों को बचाने में दिन-रात लगे हैं। अब तक लगभग डेढ़ लाख लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा चुका है। अभी भी पांच लाख से ज्यादा लोग बचाव दलों की बाट जोह रहे हैं। श्रीनगर शहर में संचार सेवा की बहाली के बाद कई हिस्सों में बिजली सप्लाई भी शुरू कर दी गई।
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जिन इलाकों में पानी ज्यादा भरा है वहां बिजली फिलहाल बंद है। शहर के ज्यादातर हिस्सों से पानी कम होने लगा है। लोग फोन पर एक-दूसरे से बात कर पा रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार पल-पल की खबर ले रहे हैं। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने शनिवार को हालात पर विचार के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाई है।
उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री को ताजा हालात बताने के लिए रियासत के छह मंत्रियों का दल वित्तमंत्री अब्दुल रहीम राथर के नेतृत्व में दिल्ली पहुंचा है। इसमें शामलाल, पीरजादा मोहम्मद सईद, अजय सडोत्रा, चौधरी मोहम्मद रमजान और अली मोहम्मद सागर शामिल है।
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जवानों से शांति बनाए रखने की अपील
ताबही की रिपोर्ट के साथ दिल्ली पहुंचा मंत्रियों का यह दल शनिवार दोपहर एक बजे प्रधानमंत्री से मुलाकात करेगा। प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह और गृह सचिव अनिल गोस्वामी ने भी त्रासदी का आकलन किया है।
केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कुछ स्थानों पर बचाव दलों पर पथराव की घटनाओं के बारे में कहा कि हमने अपने जवानों से आवेश में न आने और लोगों के क्रोध को अनदेखा करने को कहा है। हमारी पहली प्राथमिकता बाढ़ में फंसे आखिरी व्यक्ति को सुरक्षित करना है।
मुख्यमंत्री ने जम्मू और श्रीनगर के बाढ़ पीड़ित इलाकों के लिए 100-100 करोड़ रुपये की राहत राशि देने की घोषणा की है। छह माह का राशन भी मुफ्त दिया जाएगा। बाढ़ में मारे गए लोगों के परिवार वालों को साढ़े तीन-साढ़े तीन लाख रुपये दिए जाएंगे। जिनके मकान नष्ट हुए हैं, उन्हें 75 हजार रुपये की प्रारंभिक राशि दी जा रही है।
137 कैंपों में एक लाख से ज्यादा लोग
रियासत में बड़े पैमाने पर पानी, बिजली, संचार और सड़क ढांचा नष्ट हुआ है। कई पुल, सरकारी और निजी इमारतें ध्वस्त हो गईं हैं। कुल नुकसान का अनुमान लगाना भी अभी मुमकिन नहीं है। यह कई हजार करोड़ में है। श्रीनगर को पूरी तरह फिर से बसाना होगा। घाटी में वर्तमान में 137 रिलीफ कैंप लगे हुए हैं, जिनमें एक लाख से ज्यदा लोगों की देखरेख की जा रही है।
जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे लगातार नौवें दिन पूरी तरह बंद रहा। नेशनल हाईवे पर रामबन और बनिहाल के पास फंसे लगभग 11 हजार लोगों को सेना ने बाहर निकाला। नेशनल हाईवे पर बनिहाल, बटोत, कुद, पत्नीटाप, चिनैनी, उधमपुर आदि स्थानों पर बड़ी संख्या में यात्री फंसे हैं।
चार फील्ड हास्पिटल स्थापित उत्तरी कमान के सैन्य प्रवक्ता कर्नल एसडी गोस्वामी ने बताया कि सेना ने अवंतीपोरा, पट्टन, अनंतनाग और ओल्ड एयरफील्ड में चार फील्ड अस्पताल बनाए हैं। अंबाला से एक अन्य फील्ड हास्पिटल रवाना हो चुका है, जो घाटी में स्थापित किया जाएगा। रियासत में 19 टन दवाएं पहुंच चुकी हैं।
कश्मीर के बाढ़ प्रभावित इलाकों में संचार सेवा स्थापित करने के प्रयास में तमाम मोबाइल कंपनियों ने फ्री सेवा शुरू कर दी है। कश्मीर से कोई भी व्यक्ति फ्री एसटीडी काल और एसएमएस कर अपने रिश्तेदारों से संपर्क कर सकता है। बीएसएनएल पांच हजार मोबाइल सिम मुफ्त में बांटेगा।
बीएसएनएल के जीएम (कश्मीर रेंज) डीके अग्रवाल ने बताया कि पांच हजार सिम फ्री बांटेंगे। पहले दिन 1500 सिम बांटे जा चुके हैं। जब तक कश्मीर में बाढ़ का प्रभाव रहेगा, यह सिम चलते रहेंगे। उन्होंने बताया कि घाटी में बीएलएनएल की सर्विस पूरी तरह शुरू हो चुकी है। श्रीनगर के अलग-अलग क्षेत्रों में नौ अस्थाई पीसीओ खोले गए हैं।
इनमें पांच श्रीनगर एयरपोर्ट पर लगाए गए हैं। इसके अलावा गुरुद्वारा शहीद बंगा के अलावा अन्य मस्जिदों में पीसीओ लगाए गए हैं। बीएसएनएल के अनुसार अगले दस दिन तक लोग लोकल, एसटीडी और एसएमएस फ्री कर सकते हैं। उधर, एयरसेल की सर्विस शुरू हो गई है।
जम्मू कश्मीर के आपरेशनल इंचार्ज बलबीर सिंह ने बताया कि इसके लिए बाहर से भी इंजीनियर बुलाए गए हैं। संचार कंपनियों के तमाम प्रयासों के बावजूद कश्मीर घाटी में कई क्षेत्र ऐसे हैं, जहां मोबाइल सेवा पूरी तरह काम नहीं कर पा रही है।