जम्मू-कश्मीर में आतंकियों की भर्ती पर सख्ती और युवाओं के घटते रुझान के चलते अब आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने अन्य राज्यों में अपनी सक्रियता बढ़ानी शुरू की है। उत्तर प्रदेश के देवबंद में पकड़े गए आतंकी इसी माड्यूल का हिस्सा बताए जाते हैं। संगठन की ओर से अन्य राज्यों के युवाओं को झांसे में लाकर जेहादी मानसिकता भरने की साजिश के तहत ही कई युवाओं को कश्मीर से बाहर पढ़ने के लिए भेजे जाने की बात सामने आई है।
खुफिया एजेंसी से जुड़े सूत्रों ने बताया कि घाटी के टेंपरामेंट में धीरे-धीरे काफी बदलाव आया है। अब युवा पत्थरबाजी तथा आतंकी गतिविधियों में कम रुचि लेने लगे हैं। इसका एक बड़ा कारण पिछले एक साल में आतंकी संगठनों को हुई भारी नुकसान की वजह से उत्पन्न डर भी है। साथ ही उन्हें अब लगने लगा है कि इस रास्ते से उन्हें कुछ हासिल नहीं होने वाला है।
इसमें अभिभावकों की भूमिका भी काफी महत्वपूर्ण है। यही वजह है कि अब सेना या अन्य सुरक्षा बलों की भर्ती में हजारों की संख्या में युवा उमड़ते हैं। आतंकवाद से सबसे अधिक प्रभावित दक्षिणी कश्मीर में महिलाएं भी पुलिस की भर्ती के लिए पिछले दिनों पहुंचीं थी। बारामुला में सेना की 161 टीए (जैकलाई) की भर्ती रैली में वीरवार को करीब 3000 युवा शामिल हुए।
आईजी कश्मीर एसपी पाणि का कहना है कि युवाओं के आतंक से जुड़ने में कमी आई है। टाप कमांडरों के मारे जाने से स्थानीय युवाओं के बंदूक थामने की घटनाओं में पिछले तीन महीने में कमी आई है। बच्चों की घर वापसी में उनके परिवार वालों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।