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Jammu News: सुपर स्पेशियलिटी में अब आपरेटिंग माइक्रोस्कोप से होगी न्यूरोसर्जरी

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जम्मू। जीएमसी जम्मू के संबद्ध अस्पताल सुपर स्पेशियलिटी के न्यूरोसर्जरी विभाग में अत्याधुनिक आपरेटिंग माइक्रोस्कोप मशीन से न्यूरोसर्जरी का कायाकल्प होगा। इस मशीन से गंभीर और अहम न्यूरोसर्जरी संभव हो सकेगी। इससे खासतौर पर सड़क हादसों और अन्य घटनाओं में आने वाले हेड इंजुरी (दिमाग की चोट) के मरीजों को राहत मिलेगी। अभी ऐसी अधिकांश सर्जरी के लिए तीमारदार अपने मरीजों को दूसरे राज्यों में लेकर जा रहे हैं। सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के लिए छह करोड़ रुपये की अत्याधुनिक आपरेटिंव माइक्रोस्कोप मशीन को मंजूरी दी गई है।
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जम्मू संभाग के दस जिलों में हर साल हेड इंजूरी के मामले बढ़ रहे हैं। इनमें अधिकांश मामले सड़क हादसों से जुड़े होते हैं। संभाग स्तर पर सुपर स्पेशियलिटी में ही न्यूरोसर्जरी की सुविधा है। लेकिन यहां भी हफ्ते में कुछ ही इलेक्टिव न्यूरोसर्जरी के मामले होते हैं। जबकि आपात मामलों को जीएमसी में देखा जाता है। लेकिन आपरेटिंग माइक्रोस्कोप जैसी अत्याधुनिक मशीन के न होने के कारण गंभीर मामले नहीं हो पाते हैं। हालांकि सुपर स्पेशियलिटी के न्यूरोसर्जरी विभाग में एक मशीन लगाई गई थी, जिसकी मयाद पूरी हो गई है। एक ऑपरेटिंग या सर्जिकल माइक्रोस्कोप एक ऑप्टिकल उपकरण है जो सर्जन को सर्जिकल क्षेत्र में छोटी संरचनाओं और उच्च गुणवत्ता वाली सर्जरी के लिए मदद करता है। सड़क हादसों में अधिकांश ब्रेन या स्पाइन के ही मामले अस्पतालों में पहुंचते हैं, जिनमें कई ब्रेन के मामलों में तत्काल न्यूरोसर्जरी की जरूरत होती है। न्यूरो सर्जिकल ऑपरेटिंग माइक्रोस्कोप लैप्रोस्कोप से एडवांस होता है। इसमें मरीज के सिर में छोटा सा सूराख कर माइक्रोस्कोप के जरिए अंदर जाकर ब्रेन की थ्रीडी इमेज 20 गुना बड़ी देखी जा सकती है। इसकी मदद से ब्रेन की एंजियोग्राफी संभव है। इसकी मदद से ब्रेन व स्पाइन की वेन्स, आर्टरी व ट्यूमर अलग-अलग रंग के दिखाई पड़ते हैं। इसलिए सर्जरी करना व ट्यूमर निकालना आसान हो जाता है। यह सर्जिकल माइक्रोस्कोप एक ऑप्टिकल माइक्रोस्कोप है जिसे विशेष रूप से सर्जिकल माइक्रोसर्जरी में उपयोग करने के लिए डिज़ाइन किया जाता है। माइक्रोस्कोप कोशिकाओं के आकार को बीस गुणा तक बढ़ाकर दिखाता है। किन कोशिकाओं में बीमारी है या उसके आगे फैलने की आशंका है। दिमाग के भीतर कई छोटे छोटे हिस्से होते हैं, जिसमें सामान्य तौर पर देखना मुश्किल होता है, लेकिन माइक्रोस्कोप की मदद से यह संभव होता है। सामान्य न्यूरोसर्जरी में खराब कोशिकाओं के साथ सामान्य सेल के कटने का खतरा रहता है, जिससे मरीज को नुकसान हो सकता है। जीएमसी जम्मू के प्रिंसिपल डा. आशुतोष गुप्ता ने कहा कि आपरेटिंव माइक्रोस्कोप न्यूरोसर्जरी मशीन के लिए मंजूरी मिल गई है। इससे न्यूरोसर्जरी क्षेत्र को मजबूती मिलेगी। हम न्यूरो के अहम और गंभीर मामले भी यहीं पर कर सकेंगे। मशीन की मंजूरी के बाद अगले कुछ महीनों में इसे सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में स्थापित कर दिया जाएगा।

संभाग में हर साल बढ़ रहे हेड इंजुरी के मामले
जम्मू संभाग में हर साल हेड इंजुरी के मामले बढ़ रहे हैं। इनका मुख्य कारण सड़क हादसे और दूसरी घटनाएं हैं। स्वास्थ्य विभाग के आपात केंद्रों की बात करें तो वर्ष 2022 में जम्मू संभाग में 911 हेड इंजुरी के मामले रिपोर्ट हुए। इसमें कठुआ में 201, पुंछ में 125, राजोरी में 206, सांबा में 107 मामले थे। इसी तरह वर्ष 2023 में 1628 हेड इंजुरी के मामले रिपोर्ट हुए। इसमें उधमपुर से 376, सांबा में 103, रामबन में 193, राजोरी में 208, जम्मू में 158 और डोडा में 242 मामले रिपोर्ट हुए थे। वर्ष 2024 में फरवरी तक 251 मामले रिपोर्ट हो चुके हैं।
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