जम्मू। प्रदेश में तीन महीने बाद शुरू हुई सार्वजनिक परिवहन सेवा पटरी पर उतरती नहीं दिख रही है। जम्मू शहर में 26 जून से शुरू हुई मेटाडोर सेवा पांच दिन में ठप पड़ने लगी है। यात्रियों की कमी के कारण शहर के सभी रूटों पर मेटाडोर सेवा लगभग बंद हो गई है। आलम यह है कि, मेटाडोर में पचास प्रतिशत यात्री भी सफर नहीं कर रहे हैं।
तीन महीने के लंबे अंतराल के बाद शहर में जब मेटाडोर सेवा शुरू हुई थी, तो लगा था कि इससे यात्रियों और आर्थिक तंगी से जूझ रहे मेटाडोर मालिकों को राहत की सांस मिलेगी, लेकिन मेटाडोर चलने के कुछ ही दिन बाद यह उम्मीद भी टूट गई। यात्री नहीं होने से मेटाडोर लगभग बंद होने लगी है। जम्मू संभाग मेटाडोर एसोसिएशन के उपाध्यक्ष दर्शन मेहरा ने कहा कि इसका मुख्य कारण यात्रियों की कमी है। आलम यह है कि मेटाडोर में पचास प्रतिशत लोग भी नहीं बैठ रहे हैं। शहर में जहां पर पहले एक मेटाडोर दिन में पांच फेरे लगाती थी, वहीं आज एक फेरा बड़ी मुश्किल से लग रहा है। पेट्रोल डीजल के दाम लगातार बढ़ रहे हैं, ऐसे में बिना यात्रियों के मेटाडोर चलना नुकसान हो रहा है। उन्होंने कहा कि वर्तमान हालात को देखते हुए लग रहा है कि अगस्त से पहले तक इस स्थिति में सुधार नहीं होगा। उन्होंने कहा कि कुछ दिन तक शहर के सभी रूटों पर मेटाडोर चलाई, लेकिन यात्रियों की कमी हर दिन की तरह बरकरार रही। मेटाडोर में पचास प्रतिशत यात्री भी पूरे नहीं हो पा रहे थे। एक मेटाडोर में पांच से सात लोग ही सफर कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जैसे ही लोगों की संख्या बढ़ेगी, मेटाडोर को शुरू किया जाएगा।
पहाड़ी जिलों में दौड़ रही हैं मेटाडोर
डोडा, किश्तवाड़, रामबन, पुंछ, राजौरी जैसे पहाड़ी जिलों में मेटाडोर चल रही हैं। इन जिलों में लोग मेटाडोर में सफर कर रहे हैं। ग्रामीण रूटों पर जाने वालों की अच्छी संख्या है। हालांकि, ग्रामीण रूट पर चलने वाले यात्री वाहन लोगों से अधिक किराया वसूल रहे हैं।