जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री मुफ़्ती मोहम्मद सईद की हालत नाजुक होने के कारण कश्मीर में एक बार फिर राजनीतिक बदलाव के संकेत हैं। ऐसे में उनकी बेटी महबूबा मुफ़्ती अपने 80 साल के पिता की जगह ले सकती हैं।
बीबीसी संवाददाता रियाज़ मसरूर के मुताबिक 'किसी भी अंदेशे से निपटने के लिए' राज्य प्रशासन ने क़रीब 500 गाड़ियां तैयार रखी हैं। अगर कोई अंदेशा होता है, तो इसका मतलब यह भी है कि मुख्यमंत्री के तौर पर मुफ़्ती अपने दूसरे कार्यकाल का एक साल भी पूरा नहीं कर पाएंगे।
2014 के चुनावों में मुफ़्ती मोहम्मद को कश्मीर की 87 सीटों में से 25 फ़ीसदी सीटें मिलीं और उसने भारतीय जनता पार्टी के साथ गठबंधन सरकार बनाने का ख़तरा उठाया। चुनावों में भाजपा को हिंदूबहुल जम्मू में 25 फ़ीसदी सीटें मिलीं।
बीजेपी ने महबूबा को मुफ़्ती का उत्तराधिकारी स्वीकारा
मुफ़्ती की 50 वर्षीय बेटी महबूबा अपने पिता का उत्तराधिकारी बनेंगी। कई महीनों से इस बात को लेकर सुगबुगाहटें भी हैं लेकिन पीडीपी की सहयोगी बीजेपी को महबूबा की चरमपंथियों के प्रति नरमी और कट्टर अलगाववादी विचारों को लेकर कुछ संशय रहा है।
पीडीपी के एक वरिष्ठ नेता ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि अब दोनों दलों के बीच मामला सुलट गया है। बीजेपी ने महबूबा को मुफ़्ती का उत्तराधिकारी स्वीकार कर लिया है।
मुफ़्ती के समर्थक उन्हें बड़े राजनेता के तौर पर देखते हैं और उनके मुताबिक़ उन्होंने 9/11 के बाद भारत-पाकिस्तान शांति बहाल करने में अहम भूमिका निभाई थी।
क्या महबूबा पिता की विरासत आगे बढ़ा पाएंगी
हालांकि उनके विरोधियों का मानना है कि उन्होंने दक्षिण एशिया में बदलते हालात का फ़ायदा उठाकर खुद के लिए वाहवाही बटोरी। मुफ़्ती फिलहाल नई दिल्ली के अखिल भारतीय आर्युविज्ञान संस्थान में भर्ती हैं।
अब बड़ा सवाल उठता है कि क्या महबूबा सही मायनों में अपने पिता की विरासत आगे बढ़ा पाएंगी या बड़बोली और बदलते मिजाज़ वाली नेता बनकर रह जाएंगी।