महबूबा ने कहा कि जब प्रधानमंत्री कहते हैं कि वह 'दिल की दूरी' मिटाना चाहते हैं तो इस तरह के दमन का तत्काल अंत हो जाना चाहिए। गौरतलब है कि ऐतिहासिक बैठक में प्रधानमंत्री ने कहा था कि वह जम्मू-कश्मीर की जनता को दिल्ली के करीब लाने के लिए 'दिल्ली की दूरी' के साथ-साथ 'दिल की दूरी' मिटाना चाहते हैं।
पीडीपी प्रमुख ने कहा, 'जम्मू-कश्मीर के अवाम के साथ दिल की दूरी कम करने के लिए सभी काले कानूनों को पारित करना बंद करना होगा। नौकरियों और भूमि अधिकारों की रक्षा करना होगी। उन्होंने कहा, 'पहली और सबसे जरूरी बात यह है कि इस दमनकारी युग का अंत होना चाहिए और सरकार को यह समझना चाहिए कि अस्वीकृति प्रकट करना आपराधिक कृत्य नहीं है। पूरा जम्मू-कश्मीर राज्य और मैं इसे केवल एक ऐसा राज्य कहेंगे, जो जेल बन गया है।
महबूबा ने कहा कि उन्होंने दिल्ली में हुई बैठक में केवल केंद्रीय नेताओं को लोगों की समस्याओं से अवगत कराने के लिए हिस्सा लिया। उन्होंने कहा, 'मैं किसी भी सत्ता की राजनीति के लिए नहीं आई हूं क्योंकि मेरा रुख स्पष्ट है कि मैं जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा वापस मिलने तक कोई चुनाव नहीं लडूंगी।'
उन्होंने कहा, 'चूंकि निमंत्रण प्रधानमंत्री की ओर से आया था, इसलिए मैंने इसे 5 अगस्त, 2019 के बाद लोगों की पीड़ा को उजागर करने के अवसर के रूप में लिया, जब अनुच्छेद 370 को खत्म कर राज्य को असंवैधानिक रूप से विभाजित कर दिया गया था। महबूबा ने दोहराया कि जब तक जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा वापस नहीं दिया जाता, तब तक वह चुनाव नहीं लड़ेंगी।
उन्होंने कहा, 'मैंने कई बार स्पष्ट किया है कि मैं केंद्र शासित प्रदेश के तहत कोई चुनाव नहीं लड़ूंगी, लेकिन साथ ही मेरी पार्टी इस बात से भी वाकिफ है कि हम किसी को अपना राजनीतिक स्थान नहीं देंगे। हमने पिछले साल हुए जिला विकास परिषद का चुनाव लड़ा था। इसी तरह, यदि विधानसभा चुनाव की घोषणा की जाती है तो हमारी पार्टी इस पर बैठ कर विचार करेगी।