इससे पहले महबूबा मुफ्ती ने केंद्र सरकार पर सरकारी संस्थानों(जांच एजेंसियों) का तालिबानीकरण करने का आरोप लगाया था। यह बात उन्होंने मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में उनकी मां गुलशन नजीर से प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा करीब तीन घंटे तक पूछताछ के बाद कही थी।
महबूबा ने कहा कि दुर्भाग्य से जिन संस्थानों को हमारे अधिकारों की रक्षा करनी थी और जिन्हें संविधान की भावनाओं को बनाए रखना था उनका तालिबानीकरण हो चुका है। आरोप लगाया कि मीडिया का भी तालिबानीकरण हो गया है। मुख्यधारा की अधिकतर मीडिया भाजपा की बातों पर चलती है।
महबूबा ने दावा किया था कि मैंने परिसीमन आयोग से मिलने से इनकार कर दिया, जिसके अगले दिन समन मिल गया। मैंने पांच अगस्त को शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया, अगले दिन फिर समन मिल गया। एनआईए और ईडी जैसी एजेंसियों का गठन गंभीर कार्यों के लिए हुआ था लेकिन दुर्भाग्य से इन एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिज्ञों, छात्रों, कार्यकर्ताओं, पत्रकारों के खिलाफ किया जा रहा है।