केंद्र सरकार द्वारा जमात-ए-इस्लामी (जम्मू-कश्मीर) पर प्रतिबंध के खिलाफ श्रीनगर में महबूबा मुफ्ती और पीडीपी कार्यकर्ताओं ने खुलकर विरोध प्रदर्शन करना शुरू कर दिया है। वहीं केंद्र सरकार ने ‘जमात-ए-इस्लामी’ संगठन पर 5 साल का प्रतिबंध लगाने के बाद कश्मीर में संगठन से जुड़ी कई सम्पत्तियों को सील कर दिया है। बता दें कि शुक्रवार को दक्षिणी कश्मीर के कई स्थानों पर छापे मारकर सुरक्षाबलों ने संगठन से जुड़े दो दर्जन से अधिक सदस्यों को गिरफ्तार किया गया था।
पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि ‘जमात-ए-इस्लामी’ के कई नेताओं और कार्यकर्ताओं के आवास सहित कई अन्य सम्पत्तियां शुक्रवार रात को शहर और घाटी के कई इलाकों में सील कर दी गईं। साथ ही ‘जमात-ए-इस्लामी’ के नेताओं के बैंक खाते भी सील कर दिए गए हैं।
अधिकारी ने बताया कि विभिन्न जिलाधिकारियों ने भी जमात नेताओं की चल एवं अचल संपत्तियों की सूची मांगी है। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि संगठन पर प्रतिबंध या धनशोधन मामलों में एनआईए द्वारा की गई जांच से इसका कोई संबंध है या नहीं।
गौरतलब है कि जमात-ए-इस्लामी पर देश में राष्ट्र विरोधी और विध्वंसकारी गतिविधियों में शामिल होने और आतंकवादी संगठनों के साथ संपर्क में होने का आरोप है। सुरक्षाबलों ने पुलवामा में 14 फरवरी को हुए आतंकवादी हमले के बाद अलगाववादी ताकतों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है तथा जमात-ए-इस्लामी जम्मू एंड कश्मीर के कई नेताओं और समर्थकों को गिरफ्तार किया है।
सूत्रों के अनुसार श्रीनगर में सैदपोरा, हारवान तथा बेमिना इलाके में बशीर अहमद लोन व गुलाम मोहम्मद भट के आवास संबंधित तहसीलदार की ओर से सील किए गए। बांदीपोरा व कुलगाम जिला प्रशासन ने जमात से जुड़े लोगों के आवास, दफ्तर, संस्थाएं तथा चल-अचल संपत्ति सील करने के निर्देश दिए हैं। शोपियां, पुलवामा, बांदीपोरा व अनंतनाग में संगठन का दफ्तर सील कर दिया गया।
ज्ञात हो कि 22 फरवरी की रात को पूरी घाटी में सुरक्षाबलों ने छापेमारी कर 150 से अधिक अलगाववादियों और पत्थरबाजों को हिरासत में लिया था। इनमें ज्यादातर जमात-ए-इस्लामी से जुड़े हुए थे, जिनमें संगठन के राज्य प्रमुख अब्दुल हमीद फयाज भी शामिल थे। संगठन ने दावा किया था कि छापेमारी में अमीर (प्रमुख) डॉ. अब्दुल हमीद फयाज और वकील (प्रवक्ता) जाहिद अली को गिरफ्तार किया गया था। बताते हैं कि जमात-ए-इस्लामी पर पहली बार बड़ी कार्रवाई हुई थी। संगठन पूर्व में आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन की राजनीतिक शाखा के तौर पर काम करता था। हालांकि, उसने हमेशा खुद को एक सामाजिक और धार्मिक संगठन बताया।