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'कश्मीर हिंसा में सबसे गरीब परिवारों ने खोए हैं घर के चिराग'

Sat, 23 Jul 2016 07:43 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/श्रीनगर
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ह‌िंसक प्रदर्शन - फोटो : PTI
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जिन घरों के चिराग बुझे हैं वे सबसे गरीब तबके से हैं। इन गरीब परिवारों के युवाओं की मौत को महिमामंडित किया जाता है, ताकि उनकी कब्र पर सियासत की जा सके। लेकिन, ऐसे लोग पीड़ित परिवारों के दर्द का जरा भी ख्याल नहीं करते।
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मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने यह बातें एलओसी से सटे कुपवाड़ा जिले के दौरे में कहीं। कश्मीर हिंसा के पीड़ित परिवारों का दर्द बांटने पहुंचीं महबूबा ने कहा कि सबसे गरीब घरों ने अपने चिराग खोए हैं। यह देखकर उन्हें दर्द महसूस होता है।

महबूबा ने पीड़ित परिवारों की महिलाओं को गले लगाया और सरकार की ओर से हर संभव मदद देने का भरोसा दिलाया। महबूबा ने युवाओं, अभिभावकों और समाज के हर वर्ग से हिंसा से दूर रहने की अपील की।
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कश्मीर को अस्थ‌िर करने की सा‌ज‌िश

पीड़‌ित के पर‌िवार वालों से म‌िलतीं महबूबा मुफ्ती - फोटो : Amar Ujala
उन्होंने ​कहा कि हिंसा से केवल त्रासदियां ही बढ़ीं हैं। घाटी में जब भी हालात सामान्य होते हैं या फिर आर्थिक गतिविधियां बढ़ने लगती हैं तो कुछ आंतरिक और बाहरी ताकतें कश्मीर को अस्थिर बनाने में लग जाती हैं।

इस साल सैलानियों की संख्या में इजाफा होने लगा था जिसे देखकर कुछ स्वार्थी ताकतों ने मिल कर घातक हिंसा का दौर छेड़ दिया। महबूबा ने कहा हिंसा का असर हर क्षेत्र पर पड़ता है। स्थानीय अर्थव्यवस्था, पर्यटन और शिक्षा सबसे पहले प्रभावित होते हैं।

घाटी से वर्तमान में शैक्षणिक पलायन का एक और चरण शुरू हो गया है जिसमें परिवार अपने बच्चों का भविष्य संवारने के लिए घाटी से निकलने लगे हैं। यहां पर यदि अमन हो तो विकास, पर्यटन, रोजगार और लोगों की तरक्की होगी। लेकिन, अमन छिनते ही हालात बिल्कुल उलट जाते हैं। ऐसे में सबसे ज्यादा असर गरीब तबके पर पड़ता है। 
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