पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने राज्यपाल एनएन वोहरा से कहा है कि राज्य में सरकार गठन से पहले विश्वास बहाली का माहौल तैयार करना बेहद जरूरी है। इसके लिए केंद्र सरकार को ठोस आश्वासन देने होंगे।
मंगलवार को राज्यपाल के बुलावे पर उनसे मुलाकात के बाद महबूबा ने पत्रकारों से कहा कि आज मुफ्ती साहब हमारे बीच नहीं हैं, ऐसे में केंद्र की यह जिम्मेदारी बनती है कि वह रियासत में माहौल बनाए।
सरकार के गठन से पहले केंद्र को तीनों खित्तों के विकास का भरोसा दिलाना होगा। इसके तुरंत बाद भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सत शर्मा, पूर्व उप मुख्यमंत्री निर्मल सिंह और भाजपा सांसद जुगल किशोर राज्यपाल से मिले।
भाजपा एजेंडा ऑफ एलायंस पर कायम
मुलाकात के बाद निर्मल सिंह ने बताया कि हम चाहते हैं कि जल्दी से जल्दी सरकार बने, लेकिन संवैधानिक संकट यह है कि पीडीपी ने अभी तक विधायक दल का नेता नहीं चुना है। उन्होंने कहा कि भाजपा एजेंडा ऑफ एलायंस पर कायम है।
हमने राज्यपाल से कुछ वक्त मांगा है। इस बीच पीडीपी अपने विधायक दल का नेता चुन ले, इसके बाद प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा। ताजा घटनक्रम में पीडीपी ने गेंद केंद्र सरकार के पाले में डाल दी है।
बहरहाल सरकार पर फंसा पेंच जल्दी सुलझता नजर नहीं आ रहा है। पीडीपी के अनेक नेता भाजपा के साथ गठबंधन का शुरू से ही विरोध कर रहे हैं। महबूबा भी संकेत दे चुकी हैं कि उन्हें दोबारा अवाम के बीच जाने में कोई हिचक नहीं, लेकिन अवाम के हितों से समझौता नहीं करेंगी।
क्या पीडीपी-भाजपा में सब कुछ सही है?
महबूबा ने कहा कि केंद्र सरकार जब तक मुफ्ती साहब के विजन को पूरा करने का यकीन नहीं दिला देती तब तक सरकार बनाने का सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने कहा कि मेरे पास न तो अपने पिता जैसा राजनीतिक विजन है और न ही तजुर्बा।
ऐसे में यह जिम्मेदारी केंद्र की बनती है कि वह सरकार के लिए आवश्यक माहौल निर्मित करे। मुफ्ती मोहम्मद सईद के निधन के बाद से रियासत में राज्यपाल शासन लागू है। इस बीच बार-बार यह जाहिर होता रहा कि पीडीपी और भाजपा के बीच सब कुछ सही नहीं है।
राज्यपाल से मुलाकात के पहले पूर्व उप मुख्यमंत्री निर्मल सिंह ने सर्किट हाउस में पीडीपी अध्यक्ष के साथ लंबी गुफ्तगू की थी और बाहर निकलने पर सब कुछ ठीक होने की बात कही थी। सिंह ने महबूबा को भाजपा के केंद्रीय नेताओं के रुख से अवगत कराया था, पर उससे भी कुछ हासिल नहीं हुआ।