कश्मीर के पांपोर में कोरोना से अनाथ हुए बच्चों को बेचने और अवैध तरीके से गोद लेने जैसे मामलों में जीरो टॉलरेंस जांच के निर्देश जारी किए गए हैं। वीरवार को उच्च स्तरीय बैठक कर मुख्य सचिव डॉ. अरुण कुमार मेहता ने पांपोर मामले में शामिल अन्य आरोपियों को जल्द पकड़ने के लिए जांच तेज करने के लिए कहा।
गृह विभाग को जम्मू-कश्मीर में चल रहे अनाथालयों, नारी निकेतन और बाल आश्रमों के अलावा गैर सरकारी संगठनों की तरफ से चलाए जा रहे संस्थानों की निगरानी बढ़ाने के भी अधिकारियों को आदेश जारी किए। मुख्य सचिव ने कहा समाज कल्याण विभाग और कानून लागू करने वाली एजेंसियां भविष्य में पांपोर जैसी घटनाएं न हों, इसके लिए जरूरी प्रशासनिक उपायों पर गौर करे।
डीआईजी कश्मीर ने मुख्य सचिव को बताया कि पांपोर मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया है और डीएससी रैंक के अधिकारी को जांच का जिम्मा सौंपा है। एक सप्ताह में जांच पूरी होगी और विभाग इस मामले की तह तक जाएगा। कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए कड़ी धाराओं को आरोपियों पर लगाया जाएगा।
मुख्य सचिव ने कहा कि बच्चों और महिलाओं की खरीद-फरोख्त अमानवीय घटना है, इसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। कहा कि यौन शोषण और जबरन श्रम करवाने जैसे मामलों पर जीरो टॉलरेंस की नीति से काम करना होगा। उन्होंने कहा मानव खरीद फरोख्त और नारको व ड्रग से कनेक्शन के मामले आतंकवाद से भी जुड़े होते हैं।
समाज कल्याण विभाग और शिक्षा विभाग के अलावा डीसी कार्यालय से मजिस्ट्रेट को नारी आश्रमों, बाल आश्रम, संबंधित एनजीओ और ट्रस्ट के रिकॉर्ड की जांच करने के लिए संयुक्त टीमों के गठन के निर्देश भी दिए। समाज कल्याण विभाग की सचिव ने इस अवसर पर सूचना दी कि कश्मीर के पुलिस महानिरीक्षण को कानून की सख्त धाराओ के तहत तत्काल कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है।
उन्होंने कहा बाल कल्याण कमेटियो को कहा गया हैं कि कोविड अनाथ बच्चों से मिले और इस संबंध में विभाग को रिपोर्ट भी सौंपे। मुख्य सचिव ने समाज कल्याण विभाग को ऐसे केंद्रों में मानव स्रोत और लेखा का पांच वर्ष का ऑडिट करवाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने गृह विभाग को निर्देश दिए कि ऐसे सभी केंद्रों की निकटतम पुलिस थानो के माध्यम से जांच करवाए जाने के लिए भी कहा।
बताया गया कि जम्मू-कश्मीर में वर्तमान समय में करीब 6000 एनजीओ बच्चों व महिलाओं के कल्याण के लिए काम करने के लिए पंजीकृत हैं। बैठक में गृह विभाग के प्रशासनिक सचिव के अलावा सीआईडी के विशेष निदेशक, समाज कल्याण और कानून विभाग के प्रशासनिक सचिव व मंडलायुक्तों के अलावा केंद्रीय कश्मीर के डीआईजी व अन्य संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।