दुनिया की चकाचौंध और भौतिक संसाधनों को त्यागकर एक अलग जीवन जीना इतना आसान नहीं। खासतौर पर तब, जब एक सरकारी नौकरी में बड़ा ओहदा छोड़ कर संन्यासी जीवन जीना। ऐसा ही एक दंपति घर-परिवार और नौकरी छोड़ भगवा धारण कर संन्यासी जीवन का आनंद ले रहा है। श्री अमरनाथ यात्रा के लिए मध्य प्रदेश, ग्वालियर के डबरा इलाके से आए अपनी पत्नी एवं शिष्या आशानाथ के साथ योगी संजय नाथ पुरानी मंडी स्थित श्री राम मंदिर में आए हुए हैं।
योगी संजय नाथ (45 वर्ष) संन्यासी बनने से पहले मेरठ के एक सरकारी अस्पताल में बतौर डाक्टर तैनात थे, जबकि उनकी पत्नी इंडियन एयरलाइंस कंपनी में एक अच्छे पद पर कार्यरत थीं। उन्होंने बताया कि बचपन में ही पूजा-अर्चना और साधना के प्रति उनका गहरा झुकाव था, लेकिन कुछ परिस्थितियों के कारण वह अपनी पूजा और साधना के लिए इतना पर्याप्त समय नहीं निकाल पाते थे। योगी संजय नाथ ने बताया कि पहले पढ़ाई और डाक्टर बनने के बाद अपने कार्य को पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ किया।
अपने परिवार की जिम्मेदारी को निभाने के बाद अपने लिए कुछ समय निकाला। उन्होंने बताया कि वर्ष 2010 में सब कुछ त्याग कर संन्यासी बनकर अपने जीवन के कुछ बचे पलों को अध्यात्मिक साधना में बिताना चाहते हैं। योगी ने कहा कि वह विश्व में धर्म कल्याण का संदेश देना चाहते हैं। धर्म का सच्चे मन से पालन करने से विश्व में प्रेम, शांति और भाईचारा फैलेगा।
माता योगी आशानाथ ने बताया कि इंडियन एयरलाइंस की हाई प्रोफाइल नौकरी और अपने तीन बच्चों सहित परिवार को छोड़कर अपने पति एवं गुरु के साथ अध्यात्मिक जीवन बिताना पुण्य का काम है। उन्होंने कहा कि शुरू में संन्यासी जीवन जीने में दिक्कत हुई, लेकिन अब उन्हें कोई परेशानी नहीं है। अब वे भगवान की आराधना कर जीवन का आनंद ले रहे हैं।