जम्मू की हर्बल औषधियों से राजधानी दिल्ली तथा आसपास के इलाकों में इलाज किया जा रहा है। इसके लिए गुडगांव के मेदांता हास्पिटल में हर्बल बोटानिकल गार्डेन विकसित किया गया है। इसमें 30 से अधिक प्रजातियों के हर्बल प्लांट लगाए गए हैं। मरीजों को आधुनिक के साथ-साथ आयुर्वेदिक इलाज भी दिया जा रहा है।
इस गार्डेन को विकसित करने में यहां की इंडियन इंस्टीट्यूट आफ इंटिग्रेटिव मेडिसिन (आईआईआईएम) का योगदान है। आईआईआईएम तथा मेदांता द मेडिसिटी हास्पिटल के बीच पांच क्षेत्रों में दवा विकसित करने के लिए शोध के क्षेत्र में समझौता हुआ है। इसमें डायबिटीज का इलाज, घाव भरने के लिए दवा विकसित करना, कैंसर मैनेजमेंट तथा जलन के लिए हर्बल दवा विकसित करना शामिल है।
तो इसलिए लिया गया जम्मू का सहारा
शोध कार्य को अच्छे तथा परिणामपरक बनाने के लिए आईआईआईएम ने हर्बल गार्डेन विकसित किया ताकि ताजा औषधियों से बेहतर परिणाम हासिल किया जा सके। मेदांता हास्पिटल के पांचवें तल पर यह गार्डेन जम्मू के वैज्ञानिकों की देखरेख में तैयार किया गया है। हास्पिटल की डॉ. गीता कृष्णन इन औषधियों का मरीजों पर इस्तेमाल कर रही हैं।
आईआईआईएम के निदेशक डॉ. राम विश्वकर्मा का कहना है कि दरअसल बाजार में मिलने वाली औषधियों में मिलावट की बहुत अधिक संभावना बनी रहती है। इस वजह से संस्थान ने बेहतर परिणाम के लिए गार्डेन विकसित किया ताकि ताजी तथा भरोसेमंद औषधियां मिल सकें।
ये प्रमुख औषधियां लगाई गई हैं
अश्वगंधा, वसा, चित्रक, गिलोय, मेंथा, इरंडा, पत्थरचट्टा, लेमन ग्रास, निरगुंडी