राष्ट्रीय पात्रता एवं प्रवेश परीक्षा (नीट) के नतीजों के बाद अब परीक्षा पास करने वाले युवाओं की नजर विभिन्न कॉलेजों में दाखिले पर टिक गई हैं। इस बीच प्रदेश में एमबीबीएस की 160 सीटें बढ़ने जा रही हैं। इसे जम्मू-कश्मीर में सीटों की संख्या 1145 हो जाएगी। स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के अनुसार दो साल में एमबीबीएस की सीटें दोगुनी से भी ज्यादा हो जाएंगी।
स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के वित्त आयुक्त अटल डुल्लू ने कहा कि जीएमसी डोडा में अतिरिक्त 100 सीटें मिल सकती हैं। मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया से मंजूरी का इंतजार किया जा रहा है।
इसी तरह से जीएमसी कठुआ, जीएमसी राजोरी, जीएमसी अनंतनाग और जीएमसी बारामुला में भी 15 सीटें बढ़ने की उम्मीद है। डुल्लू ने कहा कि सीटें बढ़ाने की बुनियादी जरूरतों को पूरा किया जा चुका है। इस पर एमसीआई ने भी संतुष्टि जाहिर की है। अब केवल औपचारिक मंजूरी पत्र आने का ही इंतजार है।
एम्स में भी कक्षाएं शुरू करने की कवायद
स्वास्थ्य विभाग के वित्त आयुक्त ने कहा कि विजयपुर और अवंतीपोरा में निर्माणाधीन अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में एमबीबीएस की कक्षाएं शुरू करने की कवायद चल रही है।
विजयपुर एम्स का दौरा करने आई केंद्रीय टीम ने एम्स की एमबीबीएस कक्षाएं शुरू करने के लिए कठुआ जीएमसी के परिसर का निरीक्षण किया था। उम्मीद है कि 2020-21 के बैच से एम्स में भी एमबीबीएस कोर्स शुरू हो जाएगा। फिलहाल 50 सीटों की उम्मीद की जा रही है। अवंतीपोरा एम्स को अस्थायी भवन में अगले साल से शुरू किया जा सकता है।
जून 2019 में 400 सीटें हुई थीं मंजूर
एमसीआई ने जून 2019 में कठुआ, राजोरी, बारामुला और अनंतनाग जीएमसी में अतिरिक्त 400 सीटें मंजूर की थीं। डोडा जीएमसी में भवन निर्माण न होने की वजह से यहां कक्षाएं शुरू करने की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई। जम्मू-कश्मीर को 2012 में केंद्र से पांच मेडिकल कॉलेज मिले थे, लेकिन 2019 तक इन संस्थानों में जरूरी सुविधाएं नहीं दी जा सकी थीं।
ईडब्ल्यूएस श्रेणी की 85 सीटें
नए मेडिकल कॉलेज मंजूर होने के साथ ही प्रदेश में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए 85 सीटें आरक्षित की गई हैं।