इसके बाद दूसरे आतंकी के भी मौजूद होने का पता चला लेकिन तब तक वह पहाड़ी की तरफ भारी बर्फबारी वाले स्थान की तरफ भाग गया। पुलिस के अनुसार हारुन हिजबुल मुजाहिदीन का ए प्लस प्लस कैटेगरी का आतंकी था। डोडा-किश्तवाड़ रेंज के इंचार्ज डीआईजी सुजीत कुमार ने बताया कि भागे हुए आतंकी को पकड़ने के लिए सर्च ऑपरेशन जारी है।
डोडा के फुरकानाबाद घाट निवासी हारुन ने एमबीए किया है और एक दवा कंपनी के साथ काम करता था। अचानक हारुन गायब हो गया। एक सितंबर, 2018 में सोशल मीडिया के जरिये हारुन के आतंकी बनने की जानकारी मिली।
हारुन ने साथियों की मदद से किश्तवाड़ में एक वर्ष में कई आतंकी वारदातों को अंजाम दिया। हारुन के परिवार के सदस्यों ने भी सोशल मीडिया के जरिये हारुन को आत्मसमर्पण कर घर लौटने की अपील की थी, लेकिन वह नहीं माना।
भाजपा नेता अनिल परिहार और उनके भाई की हत्या, संघ नेता चंद्रकात शर्मा और उनके पीएसओ की हत्या, किश्तवाड़ के डीसी के पीएसओ के घर में घुसकर राइफल छीनने, पीडीपी के जिलाध्यक्ष व एडवोकेट के घर में घुसकर राइफल छीनने की घटनाओं में हारून और इससे पहले मारे गए आतंकी ओसामा का हाथ था।
परिहार बंधुओं की हत्या मामले में आतंकियों का मददगार गिरफ्तार
परिहार बंधुओं की हत्या के मामले में पुलिस ने आतंकियों की मदद करने वाले एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। सूत्रों के अनुसार, एक नवंबर 2018 को परिहार बंधुओं की हत्या के मामले में आतंकियों की मदद के आरोप में रुस्तम अली को गिरफ्तार किया था। कुछ दिन पूछताछ के बाद इसे छोड़ दिया था। बाद में रुस्तम गायब हो गया। दो दिन पहले पुलिस को रुस्तम को फिर पकड़ लिया है।
हारून के मारे जाने से डोडा-किश्तवाड़ में काफी हद तक आतंकी वारदातों पर अंकुश लगेगा। वह क्षेत्र में हथियार छीनने के लिए नए युवाओं को आपस में जोड़ने की कोशिश कर रहा था।
- दिलबाग सिंह, डीजीपी, जम्मू-कश्मीर