केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह के कश्मीर दौरे में रियासत में राज्यपाल शासन लागू करने की संभावना पर भी मंथन चल रहा है।
सूत्रों के मुताबिक बिगड़े हालात को पटरी पर लाने के लिए केंद्र इस विकल्प पर भी गंभीर है। हालांकि, रियासत में भाजपा भी सरकार में शामिल है और मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती खुलकर सुरक्षा बलों की कार्रवाइयों का समर्थन कर रही हैं। लेकिन, इसके बावजूद हालात में सुधार नहीं हुए तो केंद्र इस विकल्प को आजमा सकता है।
राज्यपाल एनएन वोहरा पहले ही पद से छुट्टी की केंद्र से गुहार लगा चुके हैं। ऐसे में राज्यपाल शासन से पहले गवर्नर बदलने की भी जरूरत होगी। फिलहाल राजनाथ कश्मीरियों का दिल जीतने की मुहिम को आगे बढ़ाने में जुटे हैं।
हिंसा भड़काने वालों की सूची तैयार
गृहमंत्री राजनाथ सिंह
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सूत्रों के मुताबिक केंद्र सरकार ने ऐसे 60 लोगों की सूची तैयार की है जो राज्य में अशांति फैलाने और बच्चों-युवाओं को भड़काने में लगे हुए हैं। केंद्र सरकार चाहती हैं कि राज्य सरकार इनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करे। केंद्र सरकार का मानना है कि इन 60 लोगों पर कार्रवाई के बाद हालात पर काबू में पाने में ज्यादा वक्त नहीं लगेगा।
गृहमंत्री राजनाथ सिंह भी हिंसा की जमीनी हकीकत जानने के लिए श्रीनगर में मौजूद है। सरकार की ओर से बार-बार बयान जारी कर इस बात को स्पष्ट किया जा रहा कि कश्मीर मुद्दे पर संविधाय के दायरे में ही बात की जाएगी। जबकि अलगाववादियों का कहना है कि संविधान के दायरे में रहकर कश्मीर मुद्दे का समाधान नहीं हो सकता।
गृहमंत्री कश्मीर में अब तक राज्य सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की समीक्षा कर रहे। समीक्षा के बाद ही आगे की रणनीति पर फैसला लिया जाएगा।
हालात सुधारने के लिए बीएसएफ की तैनाती
श्रीनगर में सुरक्षा बलों पर पथराव करते युवक
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गौरतलब है कि आठ जुलाई को हिजबुल कमांडर बुरहान वानी के मारे जाने के बाद से ही कश्मीर में हिंसा जारी है। तमाम प्रयासों के बाद भी हिंसा पर काबू नहीं पाया जा सका है।
इस हिंसा में अभी तक 2200 सुरक्षा बल के जवान और 4000 से ज्यादा नागरिक घायल हो चुके हैं। हिंसा पर काबू पाने के लिए सरकार ने 12 साल बाद घाटी के भीतरी इलाकों में बीएसएफ की तैनाती की है।