कुलगाम में महिला शिक्षक रजनी बाला की हत्या के बाद एक बार कश्मीर से लेकर जम्मू तक लोगों में भारी रोष देखने को मिल रहा है। इसे लेकर कश्मीरी पंडितों ने कश्मीर अलग-अलग स्थानों पर प्रदर्शन किया। जम्मू के जगती टाउनशिप में कश्मीरी पंडितों ने बैठक कर इस हमले की निंदी की। साथ ही इस बार क्षीर भवानी मेले में नहीं जाने का भी फैसला लिया है।
माता क्षीर भवानी अस्थान ट्रस्ट जगती का कहना है कि कश्मीर में बिगड़े हालातों को लेकर सरकार की तरफ से कोई ठोस उपाय नहीं किए जाने को लेकर इस बार वे क्षीर भवानी मेले में नहीं जाएंगे। साथ ही उन्होंने अन्य लोगों से भी क्षीर भवानी मेले में नहीं जाने की अपील की है।
ट्रस्ट के अध्यक्ष काका जी भान ने कहा कि कुलगाम में अब एक शिक्षिका को आतंकियों ने निशाना बनाया है। आए दिन घाटी में टारगेट किलिंग हो रही है। इसे लेकर कश्मीरी पंडित लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं और सरकार की तरफ से सिर्फ आश्वासन ही मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि घाटी से कश्मीरी अल्पसंख्यकों को सुरक्षित जगह पर तैनात किया जाना चाहिए। इस को लेकर ट्रस्ट ने इस बार क्षीर भवानी मेले में नहीं जाने का फैसला लिया है और साथ ही अन्य लोगों से भी अपील की है कि वे इस मेले में न शामिल हों।
इस साल आठ जून को कश्मीर के गांदरबल जिले के तुलमुला में क्षीर भवानी मेले का आयोजन होना है। कोरोना महामारी के चलते दो साल क्षीर भवानी मेला नहीं हो पाया था। इस बार श्रद्धालुओं के साथ ही प्रशासन ने भी इसे लेकर तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी बीच माता क्षीर भवानी अस्थान ट्रस्ट के इस फैसले से तैयारियां फीकी पड़ सकती हैं।
उधर, घाटी में जगह-जगह कश्मीरी पंडित प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर जम्मू-कश्मीर सरकार ने 24 घंटे में उन्हें सुरक्षित जगहों पर ट्रांसफर करने को लेकर उचित फैसला नहीं लिया तो वे घाटी से समूह पलायन करेंगे। कश्मीर में प्रधानमंत्री रोजगार पैकेज के तहत नौकरी कर रहे कश्मीरी पंडित काम का बहिष्कार कर रहे हैं। उनका कहना है कि वे घाटी में कैदियों जैसी जिंदगी नहीं जीना चाहते हैं। इसलिए उन्हें घाटी से बाहर शिफ्ट किया जाना चाहिए। सरकार उन्हें बड़े-बड़े आश्वासन देती है, लेकिन इससे उनका जीवन सुरक्षित नहीं हो पा रहा है।