पीडीपी और भाजपा गठबंधन ने पंचायत चुनाव को प्रतिष्ठा की जंग मानकर तैयारियां शुरू कर दी है। आतंकी बुरहान वानी की मौत के बाद कश्मीर में 5 महीने तक चले हिंसा के दौर के बाद भाजपा और पीडीपी के लिए पंचायत चुनाव ज्यादा महत्वपूर्ण हो गए हैं। दोनों दल गठबंधन के तहत ही पंचायत चुनावों में समर्थकों को उतारने वाले हैं।
चुनाव में अधिकांश समर्थकों को जिताकर दोनों पार्टियां यह साबित करना चाहती हैं कि जनादेश अब भी उनके साथ है। पंचायत चुनाव टलने के कारण कई केंद्रीय अनुदानों पर भी असर पड़ा है। लिहाजा रियासत सरकार समय पर पंचायत चुनाव कराने के लिए प्रतिबद्ध है।
निजाम में भारी उलटफेर को पंचायत चुनाव की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है। सरकार ने पुलिस प्रशासन और केएएस स्तर के अधिकारियों के बड़े पैमाने पर तबादले कर पंचायत चुनाव के लिए अधिकारियों की पर्याप्त तैनाती सुनिश्चित करने की कोशिश की है। हांलाकि आईएएस अधिकारियों के तबादले पर अब भी पीडीपी और भाजपा में कुछ नामों पर मतभेद की स्थिति बनी हुई है।
पंचायती चुनावों की घोषणा से पूर्व बड़े स्तर पर तबादले
महबूबा मुफ्ती
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केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से लौटने वाले अफसरों के इंतजार में फिलहाल आईएएस अफसरों के तबादले टाल दिए गए हैं। कैबिनेट में जिन आईएएस अफसरों के तबादले तय हुए थे, उनके नाम भी जारी नहीं हुए। सूत्रों के मुताबिक जम्मू के डीसी और डिविजनल कमिश्नर के तबादले पर कैबिनेट में सहमति थी लेकिन बाद में इन तबादलों को टाल दिया गया।
मुख्य चुनाव अधिकारी शांतमनु की केंद्रीय प्रतिनियुक्ति तय हो गई है लेकिन अब रियासत सरकार उन्हें पंचायत चुनाव के बाद ही रिलीव करेगी। पंचायती चुनावों की घोषणा से पूर्व बड़े स्तर पर तबादलों की धमक रियासत में सुनाई दे रही है। कबीना बैठक में बड़े पैमाने पर निजाम में फेरबदल के बाद पुलिस में डीएसपी स्तर पर भी बड़ी संख्या में तबादले हुए है।
सरकारी स्तर पर पंचायती चुनाव की तैयारी जोरशोर से जारी है। मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती इस मामले पर राज्यपाल एन एन वोहरा से भी चर्चा कर चुकी है। ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग और रियासत का चुनाव विभाग भी तैयारियों में जोरशोर से जुटा है।
पंचायती स्तर पर जन संपर्क यात्रा का सिलसिला शुरू
भाजपा
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आधिकारिक सूत्रों की माने तो बड़े स्तर पर हो रहे तबादलों से सरकार चुनाव के लिए माहौल तैयार करना चाहती हैं ताकि नए अधिकारी बेहतर तरीके से कार्य कर सकें। इसके अलावा सियासी दलों ने भी ग्रामीण इलाकों तक पहुंचना शुरू कर दिया है। भाजपा ने यहां पंचायती स्तर पर जन संपर्क यात्रा का सिलसिला शुरू कर दिया है।
वहीं पीडीपी, कांग्रेस, नेशनल कांफ्रेंस, पैंथर्स पार्टी भी पंचायती चुनाव की तैयारियों में जुटी हुई है। इसके लिए ग्रामीण क्षेत्रों में पार्टियां अपनी इकाईयों को भी मजबूत प्रदान करने में जुट गई है। रियासत खासतौर से कश्मीर में अगर हालात सामान्य रहते हैं तो मार्च महीने में चुनाव की घोषणा होने के आसार है।