आतंकियों को भगाने के लिए शोपियां में भारी संख्या में नकाबपोश पत्थरबाज सामने आ गए। आपरेशन में खलल डालने के लिए उन्होंने भारी पथराव किया। आस-पास के गांवों से भी काफी संख्या में लोग मुठभेड़ स्थल पर जुट गए। हालांकि, सुरक्षा बलों ने पथराव की परवाह न करते हुए ऑपरेशन जारी रखा।
दहशतगर्दों को भगाने के लिए स्थानीय युवाओं के साथ ही आस-पास के गांवों के युवाओं को भी पत्थरबाजी के लिए उकसाया गया। पत्थरबाजों ने अपनी पहचान छिपाने के लिए मुंह को कपड़े से ढंक कर सड़क पर उतर आए और पथराव शुरू कर दिया। कई घंटे तक चली पत्थरबाजी में कई लोग घायल हो गए। सड़क पर चारों और पत्थर ही पत्थर बिखरे पड़े हुए थे। हालांकि मुठभेड़ स्थल पर मुस्तैदी से तैनात सीआरपीएफ और जम्मू कश्मीर पुलिस के जवानों ने पत्थरबाजों से निपटने के लिए आंसू गैस के गोले दागे। पैलेट गन भी चलाए और फायरिंग भी की। दूर तक उन्हें खदेड़ा गया। काफी देर की मशक्कत के बाद इलाके में हिंसा नियंत्रित हुई।
शोपियां में पलते हैं पत्थरबाज
शोपियां अक्सर सेना और सीआरपीएफ के काफिले पर पत्थरबाजी के लिए चर्चा में बना रहता है। यहां पत्थरबाजों की संख्या काफी ज्यादा है। किसी भी ऑपरेशन में खलल डालने के लिए ये पहले से ही सारे इंतजाम कर चुके होते हैं। इन्हीं के सहारे शोपियां में आतंकी गतिविधि को अंजाम देते हैं। साल 2018 की 7 जनवरी को शोपियां के गनोवपोरा गांव से गुजर रहे सैन्य काफिले पर स्थानीय युवाओं ने पथराव किया था। इस दौरान युवाओं ने एक जेसीओ को पीट पीट कर मार डालने की भी कोशिश की थी। अपने बचाव में सेना ने फायरिंग की जिसमें दो पत्थरबाज मारे गए थे।