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भाजपा और पीडीपी पहली बैठक में दिखने लगी खटास

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भाजपा और पीडीपी के रिश्तों में आई खटास के बाद कैबिनेट की पहली बैठक में विवादास्पद मुद्दे नहीं उठे। भाजपा के मंत्रियों ने अलगाववादी मसर्रत आलम की रिहाई के मुद्दे को भी नहीं छेड़ा। बैठक पूरी तरह अगामी बजट सत्र में राज्यपाल के अभिभाषण पर ही केंद्रित रहा लेकिन अभिभाषण पर मुहर नहीं लग सकी।
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अब कैबिनेट फिर से वीरवार को इस मुद्दे पर मंथन करेगी। भाजपा की कोशिश है कि गर्वनर एन एन वोहरा का अभिभाषण पूरी तरह न्यूनतम साझा कार्यक्रम (सीएमपी) के बिन्दुओं पर ही केंद्रित रहे।

हर्रियत नेताओं से बातचीत शुरू करने की कोशिश और अन्य विवादास्पद मुद्दों का जिक्र अभिभाषण में नहीं हो। दूसरी ओर पीडीपी कश्मीरियों के जख्मों को भरने की पहल का जिक्र अभिभाषण में करना चाहती है।
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बजट सत्र 18 मार्च से शुरू होने वाला है। उसी दिन स्पीकर के चुनाव के बाद राज्यपाल विधानसभा और विधान परिषद के संयुक्त सत्र को संबोधित करेंगे। नए विधायकों का शपथ ग्रहण एक दिन पहले 17 मार्च को ही प्रोटेम स्पीकर कराएंगे।
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गठबंधन की गांठें पहले दिन से ही ढीली

भाजपा और पीडीपी के गठबंधन की गांठें पहले दिन से ही ढीली होनी शुरू हो गई थी जब मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद ने शपथ ग्रहण के तुरंत बाद शांतिपूर्ण भारी मतदान का श्रेय अलगाववादियों, आतंकियों और पाकिस्तान को दे दिया था।

बाद अलगाववादी मसर्रत आलम की रिहाई ने दोनों दलों के बीच रिश्ते में आई दरार को चौड़ा कर दिया। हांलाकि केंद्र सरकार के सख्त रुख के बाद अब मुफ्ती सरकार ने रक्षात्मक स्ट्रोक खेलना शुरू किया है।

वैसे दोनों दलों के रिश्ते सामान्य नहीं हुए हैं। कैबिनेट की बैठक में विवादास्पद मुद्दे से बचने की हर संभव कोशिश हुई। विकास की दिशा और ई गवर्नेंस को राज्यपाल के अभिभाषण में शामिल करने की बात हुई।

अमन कायम कर विकास के एजेंडे को लागू करने की बात राज्यपाल के अभिभाषण में शामिल करने पर आम सहमति है लेकिन है कि विश्वास का माहौल बनाने के नाम पर हुर्रियत से बातचीत जैसे मुद्दे पर भाजपा को ऐतराज है।
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सज्जाद ने किया कैबिनेट का बहिष्कार

विज्ञान एवं तकनीकी मंत्री सज्जाद लोन ने कैबिनेट की बैठक का बहिष्कार किया। सज्जाद को इस बात पर एतराज है कि उन्हें अहम विभाग नहीं दिए गए। पहले मुफ्ती मोहम्मद की ओर से उन्हें कैबिनेट में शामिल करने पर आपत्ति जताई गई थी।

 बाद में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की दखल पर उन्हें मंत्रिमंडल में लिया गया लेकिन अहम महकमा नहीं मिला। विभागों के वितरण के तुरंत बाद सज्जाद श्रीनगर चले गए। उन्होंने अबतक मंत्री के रूप में अबतक कार्यभार नहीं संभाला है।

बुधवार को जब कैबिनेट की बैठक हो रही थी तब वह अपने विधानसभा क्षेत्र हंदवाड़ा में एक पीड़ित परिवार से मिल रहे। इस परिवार के दो बच्चे आवारा कुत्तों के शिकार बन गए थे।
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