कुपवाड़ा में आतंकियों से लड़ते हुए शहीद होने वाले कर्नल संतोष बचपन से ही देश के लिए सर्वोच्च बलिदान की बातें किया करते थे। उनके स्कूल के सहपाठी प्रशांत पाटिल ने उनकी शहीदी पर सैन्य कर्मियों को लिखे संदेश में कहा, ‘सर्वोच्च बलिदान।
नि:संदेह। वह इसी के लिए पैदा हुआ था। स्कूल के दिनों से ही यह अत्यंत उत्साहित लड़का सर्वोच्च बलिदान की बातें किया करता था।’ उनका कहना है कि छोटे से शहर के मिल्कमैन का बेटा था।
पहलवान, लेकिन विनम्र स्वभाव। दूध बेचने के परिवार के पुस्तैनी धंधे को छोड़ उसने सैनिक स्कूल सतारा में दाखिला लिया। मानसिक रूप से शांत। आचरण से कोमल और उसके दिल में कुछ करने का तूफान था।
स्कूल का सर्वश्रेष्ठ मुक्केबाज, स्टेट स्कूल फुटबाल टीम का बेस्ट गोलकीपर और पागलों की तरह दौड़ने वाला धावक। जिम में जब भी कड़ी मेहनत करता था तो उसके चेहरे पर मुस्कान होती थी। जिम में घंटों मेहनत करता था।