कर्नल मुनींद्र नाथ राय का जिंदगी के प्रति नजरिया क्या था इसे शहादत से एक दिन पहले ही व्हाट्स अप पर उनके द्वारा किए गए एक मैसेज से समझा जा सकता है।
उन्होंने लिखा था - जिंदगी में इतनी शिद्दत से निभाओ अपना किरदार, कि पर्दा गिरने के बाद भी बजतीं रहें तालियां। उन्होंने जो लिखा उसे सच भी साबित कर दिया। तभी तो शहीद के जीवन का पर्दा गिरने के बाद भी उनके सम्मान में लगातार तालियां बज रहीं हैं।
शहीद कर्नल राय का पूरा परिवार ही बहादुरी की मिसाल है। जम्मू में 2002 में रघुनाथ मंदिर पर हुए आतंकी हमले के समय उनके भाई सीआरपीएफ में कमांडिंग अफसर वाईएन राय ने मोर्चा संभाला था।
उन्होंने कहा कि मुनींद्र हम तीन भाइयों में सबसे छोटा पर सबसे बहादुर था। वाईएन राय को रघुनाथ मंदिर पर आतंकी हमले को नाकाम बनाने के लिए गैलेंट्री अवार्ड मिल चुका है।
शहीद कर्नल राय के पिता नागेंद्र प्रसाद राय ने कहा कि एक दिन पहले उनका जो बेटा झंडे को ऊंचा करने के लिए खड़ा हुआ था, आज वह खुद ही सो गया। कर्नल राय गणतंत्र दिवस के अवसर पर युद्ध सेवा मेडल से नवाजे गए थे और अगले दिन ही वे हिज्बुल मुजाहिद्दीन के आतंकियों के साथ मुठभेड़ में शहीद हो गए।
उनके करीबी और सेना के साथी बताते हैं कि वे कठिन परिस्थितियों में जितनी बहादुरी के साथ देश के लिए डटे रहते थे, उतने ही जिंदादिल इनसान भी थे। व्हॉट्स एप पर भी उन्होंने वे ही बातें साझा कीं, जिन पर असल जिंदगी में भी उन्हें यकीन था।