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औरंगजेब के पिता और दोस्त बोले, कश्मीर में शहीद हर जवान का बदला लेंगे, हमें फौज में करो भर्ती

Fri, 03 Aug 2018 10:51 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
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शहीद जवान औरंगजेब के घर पहुंचे सऊदी से लौटे गांव के युवा - फोटो : अमर उजाला
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जम्मू कश्मीर के पुंछ जिले के सलानी गांव से सऊदी अरब कमाने के लिए गए कई नौजवान औरंगजेब की शहादत की खबर मिलने के बाद उसका बदला लेने के लिए वहां से लौटने लगे हैं। सऊदी अरब से जो भी नौजवान गांव में पहुंच रहा है, वह सबसे पहले औरंगजेब के घर जाकर उसके माता-पिता को सांत्वना देता है और अपना संकल्प बता है। घर पहुंच रहे इन युवाओं को देख कर औरंगजेब के पिता सेवानिवृत्त सैनिक मोहम्मद हनीफ का सीना चौड़ा हो रहा है। उन्होंने अपने गांव के इन नौजवानों से कहा है कि वे सिर्फ औरंगजेब की शहादत का ही नहीं, कश्मीर में शहीद हुए हर जवान का बदला लेंगे।
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जिले के सलानी गांव स्थित शहीद राइफलमैन औरंगजेब के घर पर उसकी शहादत के 50 दिनों बाद एक बार फिर गहमागहमी दिखाई देने लगी है। गांव से रोजगार के लिए अरब देशों में गए कई नौजवान औरंगजेब की शहादत की खबर सुन कर अपना कामकाज छोड़ कर अपने घर लौट आए हैं। उन्होंने सबसे पहले शहीद के घर पहुंच कर उसके माता-पिता से मुलाकात की और उनका हौसला बढ़ाया। उन्होंने कहा कि वे कश्मीर में आतंकियों द्वारा औरंगजेब को शहीद करने का बदला लेने का प्रण लेकर सऊदी अरब में अपनी नौकरी छोड़ कर आ गए हैं। 

मोहम्मद हनीफ अमर उजाला के साथ अपने जज्जबात साझा करते हुए कहते हैं कि मुझे मेरे गांव के इन नौजवानों पर नाज है, जो औरंगजेब की शहादत का बदला लेने के लिए सऊदी अरब में अपना काम धंधा छोड़ कर गांव लौट आए हैं। उन्होंने कहा कि बस मेरी सरकार से विनती है कि वह जल्दी से इन नौजवानों को फौज में भर्ती करे, ताकि ये कश्मीर जाकर उसे आतंकियों से मुक्त कराएं।
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सरकार चाहे तो मेंढर के नौजवानों से खड़ी करे दो बटालियन
मोहम्मद हनीफ का कहना है कि हमने अभी सउदी अरब से लौट रहे मेंढर तहसील के कम से कम 400 नौजवानों को रोक दिया है। हमने उन्हें वहीं रहने को कहा है। यदि सरकार चाहेगी तो हम मेंढर के नौजवानों की दो बटालियन खड़ी करने के लिए उन्हें जवान देंगे। मैंने इस बारे में रक्षा मंत्री, चीफ ऑफ द आर्मी स्टाफ से भी बात की है। हम गृहमंत्री राजनाथ सिंह से भी आग्रह करते हैं कि वह हमारे इन नौजवानों की भावनाओं की कद्र करते हुए उन्हें फौज में भर्ती करें और इन्हें कश्मीर भेजे। 
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