जम्मू में हुई शादी पर न्यूयॉर्क सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी किए गए तलाक आदेश पर जम्मू सिटी जज ने रोक लगा दी है। रियासत में अपनी तरह के इस पहले मामले में याची की पत्नी ने न्यूयॉर्क कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
अदालत में पेश की गई याची की दलीलों के अनुसार, रियासत में हिंदु रीति रिवाज से होने वाली शादी जेएंडके हिंदु मैरिज एक्ट 1961 का अधिकार क्षेत्र है, जिस पर विवाद का निपटारा भी जम्मू-कश्मीर में ही हो सकता है। याची की पत्नी की याचिका पर न्यूयॉर्क सुप्रीम कोर्ट ने एकतरफा फैसला दे दिया, जो कानून की नजर में किसी तरह से मान्य नहीं है। अदालत ने न्यूयॉर्क सुप्रीम कोर्ट के तलाक आदेश पर अगली सुनवाई तक रोक का आदेश जारी कर दिया।
याची निखिल (बदला हुआ नाम) की ओर से अदालत में पेश हुए एडवोकेट एके साहनी, असीम साहनी, नीरज सिंह, उत्कर्ष पठानिया, ईला शर्मा और शिवदेव ठाकुर ने अदालत को बताया कि निखिल की शादी सोनी (बदला हुआ नाम) के साथ पूरे हिंदु रीति रिवाजाें से 22 फरवरी 2008 में हुई। जम्मू के होटल में शादी का समारोह आयोजित किया गया। इसके बाद दोनाें अमेरिका चले गए।
कोर्ट
- फोटो : Demo Pic.
अमेरिका में निखिल को रोजगार और स्वास्थ्य संबंधी दिक्कताें का सामना करना पड़ा। इससे दंपति के बीच समस्याएं उत्पन्न होने लगीं। निखिल अमेरिका से भारत लौट आया जबकि पेशे से डॉक्टर सोनी अमेरिका में ही रही। निखिल के भारत लौटने के बाद सोनी ने उससे संपर्क करना छोड़ दिया। फोन, सोशल मीडिया सहित तमाम माध्यमाें से उसने अपना संपर्क काट दिया।
इस पर जब याची ने अपने अधिकारों के लिए जम्मू कोर्ट का दरवाजा खटखटाया तो कोर्ट समन के जवाब में उसकी पत्नी ने सुप्रीम कोर्ट आफ न्यूयॉर्क, काउंटी आफ मोनरो के जूनियर एक्टिंग जस्टिस जेम्स ई वाल्श द्वारा जारी किए गए तलाक आदेश की प्रति दाखिल कर दी।
याची पक्ष ने कहा, निखिल की पत्नी को जम्मू मैट्रिमोनियल कोर्ट का समन जारी किया गया था, जिसमें उसने अपना पक्ष रखने के बजाय न्यूयॉर्क कोर्ट के तलाक आदेश की प्रति दाखिल करवा दी। उन्हाेंने कहा, यह मामला न सिर्फ जेएंडके हिंदु मैरिज एक्ट के उल्लंघन से जुड़ा है बल्कि जेएंडके सीपीसी 1977 (1920 एडी) की धारा 13 के भी खिलाफ है। अमेरिकी कानून चूंकि भारतीय और जेएंडके हिंदु मैरिज एक्ट के अनुरूप नहीं है, ऐसे में अमेरिकी कोर्ट के पास इस बाबत कोई भी आदेश देने का अधिकार नहीं है।