जम्मू-कश्मीर में गठबंधन सरकार गिरने के बाद से पीडीपी के विधायकों में खलबली मची हुई है। पार्टी के गिरते ग्राफ के कारण कुछ पीडीपी विधायकों को अपने भविष्य की चिंता सताने लगी है। लिहाजा महबूबा मुफ्ती से नाराज विधायकों ने अब कांग्रेस और नेशनल कांफ्रेंस के नेताओं से संपर्क साधना शुरू कर दिया है। कांग्रेस और नेकां के कई पूर्व विधायक 2014 से पहले पीडीपी में शामिल हुए थे। वह अब घर वापसी की राह पर दिख रहे हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय मुफ्ती मोहम्मद सईद के विजन और उनकी बेहतर प्रशासनिक कुशलता के कारण कश्मीर और जम्मू के डोडा, पुंछ क्षेत्र के कई नेताओं ने पीडीपी का हाथ थामा था। राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार पीडीपी की घाटी में भी अब खास असर नहीं है। वर्ष 2016 में पीडीपी के श्रीनगर की संसदीय सीट खोने के बाद से ही पत्थरबाजी और आतंकी घटनाओं में बढ़ोतरी हुई है।