सुदूर पहाड़ियों में बसा मान तलाई जम्मू से 125 किलोमीटर दूर है। मान तलाई अपने बेहद खूबसूरत नजरों के लिए जाना जाता है। पयर्टन स्थलों में इसका अपना महत्व है लेकिन सरकार की उपेक्षा के कारण ये इलाका उतना फेसम नहीं हो पाया जितने जम्मू के अन्य पर्यटन स्थल हैं।
अगर आप कुदरत के हसीन नजरों के बीच में कुछ समय शांति से बीताना चाहते हैं तो यह आपके लिए सही जगह है। यह केवल पर्यटन स्थल नहीं है इसका अपना धार्मिक महत्व भी है।
बताया जाता है कि भगवान शिव ने माता पार्वती से यहीं पर विवाह संपन्न किया था। कैलाश पर्वत से होते हुए भोले बाबा की बारात यहीं पहुंची थी और भूत प्रेतों की बारात को देखकर मानतलाई के लोग हैरान रह गए थे।
महेंद्र गिरी इस स्थान को लाना चाहते थे दुनिया की नजरों में
यहां पर वह मंदिर जिसमें विवाह संपन्न कराया गया था आज भी मौजूद है। बताया जाता है कि मंदिर में वह स्नान कुंड जिसमें पार्वती स्नान करने आती थीं आज भी यहां पर मौजूद है। मंदिर के पास ही बाबा महेंद्र गिरी का आश्रम भी है।
एक समय में यह आश्रम बहुत प्रसिद्ध था लेकिन महेंद्र गिरी की मृत्यु के बाद से यहां सब कुछ वैसे ही पड़ा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि महेंद्र गिरी अपने आश्रम में एक 15 मंजिला पांच सितारा होटल का निर्माण करा रहे थे।
अभी होटल काम आधा ही हो पाया था कि जहाज दुर्घटना में उनकी मृत्यु हो गई। इसके साथ ही यहां पर बहु मंजिला अस्पताल बनाने का सपना भी अधूरा ही रह गया।
कब जाना चहिए मान तलाई
अगर आप मान तलाई आना चाहते हैं तो मार्च से मई और सितंबर से नवंबर तक का समय सबसे बेहतर है। सर्दी में यहां बर्फबारी का मजा भी लिया जा सकता है लेकिन कई बार रास्ते बंद होने के कारण यहां आना खतरनाक हो सकता है। अगर आप यहां जाना चाहते हैं तो उधमपुर से अपनी कार या टैक्सी लेकर ही जाएं।
इलाके में यातायात सुविधा अभी ज्यादा बेहतर नहीं है। टैक्सी जम्मू से भी की जा सकती है। हम रास्ते का लुत्फ लेते हुए यहां पहुंचे इस लिए हमने टैक्सी का विचार पहले ही छोड़ दिया था। हमने जम्मू से बस में चिनैनी तक का सफर किया।
क्या खास है यहां
इसके बाद चिनैनी से मिनी बस (मैटाडोर) से आगे की 32 किलोमीटर की यात्रा की। इस 32 किलोमीटर की यात्रा में मंत्रमुग्ध करने वाले नजारे देखने को मिलते है। यहां नाशपाती और सेब के बाग भी देखे जा सकते हैं। पहाड़ का घुमावदार रास्ता बेहद रोमांच पैदा करता है।
चिनैनी से करीब 25 किलोमीटर आगे सुद्धमहादेव का मंदिर है। कुछ लोगों का दावा है कि शिव-पार्वती विवाह यहीं पर हुआ था। सुद्धमहादेव की प्रतिष्ठा बहुत दूर तक फैली है। जून माह में यहां पर मेले का आयोजन किया जाता है जिसमें देश भर से लोग आते हैं। यहां से सात किलोमीटर आगे मानतलाई है।