जम्मू के सपूत को राष्ट्रपति द्वारा शौर्य चक्र से नवाजा गया। 21 मार्च को राष्ट्रपति भवन में आयोजित अलंकरण समारोह में मेजर सतनाम सिंह को शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया। मेजर सतनाम सिंह सांबा जिले के गांव रक्ख जंग के रहने वाले हैं। उनके पिता दर्शन सिंह बीएसएस जम्मू फ्रंटियर में हेड क्लर्क के पद से दो साल पहले रिटायर्ड हो चुके हैं।
मेजर सतनाम परिवार में भाइयों में सबसे छोटे हैं। मेजर सतनाम को नौ दिसंबर, 2013 को मणिपुर के थाउबल जिले में स्थित सामान्य क्षेत्र नेपाली खुट्टी में केएनएफ (एन) के छह आतंकियों के बारे में सूचना मिली। खोजबीन के दौरान उनकी टुकड़ी पर आतंकियों ने हमला कर दिया।
मेजर सतनाम के नेतृत्व में सेना के जवानों ने आतंकियों का डट कर मुकाबला किया। इसमें दो आतंकी मारे गए और एक घायल हो गया। मेजर सतनाम ने अदम्य पराक्रम और वीरता का परिचय दिया।
मेजर सतनाम ने बीएसएफ स्कूल से स्कूल शिक्षा प्राप्त करने के बाद इंजीनियरिंग की, जिसके बाद वह सेना की इंजीनियरिंग कोर में भर्ती हो गए। दिसंबर 2013 में वह असम राइफल्स की 15 बटालियन में कार्यरत थे।