श्रीनगर में कार्यक्रम के दौरान उपराज्यपाल मनोज सिन्हा
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उप राज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा है कि आतंकवाद जम्मू-कश्मीर में अंतिम सांसें ले रहा है। इस समय आतंकवाद उस दिये की तरह है, जो बुझने से पहले भभक रहा है। यदि जनता ने सहयोग दिया तो इस दीये को जल्द ही बुझाने में कामयाब होंगे।
कश्मीर में हाल में हुई हत्याओं के पीछे पाकिस्तान का हाथ
शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर (एसकेआईसीसी) में एक कार्यक्रम में एलजी ने कहा कि कश्मीर में हाल में हुई हत्याओं के पीछे पाकिस्तान का हाथ है। कुछ तत्व सीमा पार से अस्थिरता पैदा करने की कोशिशें कर रहे हैं। उन्हें यहां आर्थिक गतिविधियां बढ़ने और पर्यटकों की अच्छी आमद पच नहीं रही है।
आतंकवाद अब अपने अंतिम चरण में है
एलजी ने दावा किया कि कश्मीर में आतंकवाद अब अपने अंतिम चरण में है। यहां के लोग मौजूदा स्थितियों के बारे में अच्छी तरह जान चुके हैं। प्रशासन और सुरक्षा बल मौजूदा स्थितियों से निपटने के लिए पूरी क्षमता के साथ तैयारी कर रहे हैं।
हत्या कर आतंकी सुरक्षा बलों को उकसाना चाहते हैं
इससे पूर्व रविवार को एलजी ने कहा था कि कश्मीर घाटी में मासूम लोगों की हत्या कर आतंकी सुरक्षा बलों को उकसाना चाहते हैं। वे चाहते हैं कि उकसावे में आकर सुरक्षा बल कोई ऐसा कदम उठाएं, जिससे आम नागरिक चपेट में आएं और माहौल खराब हो।
जनता को वारदातों के खिलाफ मुखर होना पड़ेगा
मैं जम्मू-कश्मीर के लोगों को आश्वस्त करना चाहता हूं कि किसी भी निर्दोष के खिलाफ कार्रवाई नहीं होगी। जम्मू-कश्मीर की जनता को इन वारदातों के खिलाफ मुखर होना पड़ेगा। जब तक यहां की जनता आतंकवाद की निंदा नहीं करेगी, शांति बहाल नहीं होगी।
कुछ ताकतें दोबारा लाना चाहतीं हैं हड़ताल संस्कृति
एलजी ने कहा कि कुछ ताकतें लक्षित हत्याओं के जरिये घाटी में हड़ताल संस्कृति को दोबारा वापस लाना चाहती हैं। पर्यटक काफी तादाद में आ रहे हैं। इससे अर्थव्यवस्था में व्यापक पैमाने पर सुधार आ रहा है। कुछ लोग चाहते हैं कि किसी तरह से यहां की अर्थव्यवस्था को खतरे में डाला जाए।
प्रशासन, सुरक्षा बल अपना काम करेंगे
प्रशासन, सुरक्षा बल अपना काम करेंगे, लेकिन अवाम से भी निवेदन है कि ऐसे लोगों को पहचानने की जरूरत है। यह कभी जम्मू-कश्मीर का भला नहीं कर सकते हैं। ऐसे लोगों की निंदा करना हर जिम्मेदार नागरिक का प्रथम कर्तव्य है।
बढ़ती अर्थव्यवस्था, विकास के बढ़ते कदम रास नहीं आ रहे हैं। यह जम्मू-कश्मीर को उसी रास्ते पर ले जाना चाहते हैं जब रोज दुकानें बंद रहती थी, जब रोज हड़ताल होती थी, बच्चे स्कूल नहीं जा पाते थे। यह अवसर है ।