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जम्मू-कश्मीरः सरकारी और वन भूमि पर कब्जा करने वालों की अब खैर नहीं, एक्शन मोड में प्रशासन

Thu, 02 Jul 2020 05:24 PM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
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जम्मू-कश्मीर में सरकारी और वन भूमि से अवैध कब्जे छुड़ाने के लिए उप राज्यपाल प्रशासन ने तैयारी तेज कर दी है। राजस्व विभाग को सारा रिकॉर्ड डिजिटाइज करने के लिए 31 जुलाई तक की आखिरी मियाद दी गई है। उप राज्यपाल गिरीश चंद्र मुर्मू ने चिंता जताते हुए अधिकारियों से कहा है कि प्रदेश में 21 लाख एकड़ सरकारी व वन भूमि पर कब्जे हैं। अभी तक नौ लाख कनाल से अवैध कब्जे केवल कागजों में ही हटाए गए हैं। हर हाल में 31 जुलाई तक रिकॉर्ड डिजिटाइज कर अवैध कब्जे हटाने की व्यवस्था करें।

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प्रदेश में डिजिटल इंडिया लैंड रिकॉर्ड्स मॉडर्नाइजेशन प्रोग्राम की समीक्षा के दौरान उप राज्यपाल ने काम की धीमी रफ्तार पर कड़ा संज्ञान लिया। सूत्रों ने बताया कि जम्मू संभाग में नौ लाख कनाल सरकारी और वन भूमि को कागजों में ही खाली कराया गया है। जमीन पर अभी भी कब्जे जस के तस हैं। जम्मू-कश्मीर में 21 लाख एकड़ सरकारी और वन भूमि पर अवैध कब्जे हैं, जिसे भूमाफिया और राजस्व अधिकारियों की सांठगांठ से अंजाम दिया गया है।

एलजी प्रशासन ने इस गठजोड़ को तोड़ने के लिए जिला स्तर पर कई अधिकारियों को सेटलमेंट कमिश्नर के अधिकार दिए हैं। डोडा, बारामुला, उधमपुर और राजोरी समेत अन्य जिलों में 26 जून को सर्वे एंड लैंड रिकॉर्ड्स विभाग के निदेशक भी तैनात किए गए हैं। इसी बीच अब 31 जुलाई तक हर हाल में रिकॉर्ड को डिजिटाइज करने के निर्देश जारी किए गए हैं। यह काम पूरा होते ही अवैध एंट्री खारिज करने के साथ ही अवैध कब्जे छुड़ाने का काम तेज किया जाएगा।  
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2015 में शुरू हुआ था डिजिटाइजेशन  
राजस्व विभाग के रिकॉर्ड को डिजिटाइज करने का काम रिकॉर्ड्स मैनेजमेंट एजेंसी ने 2015 में शुरू किया था। प्रदेश में कुल 666.49 लाख राजस्व रिकॉर्ड हैं, जिनमें से दिसंबर 2017 तक जम्मू में 105.84 लाख और कश्मीर में 58.77 लाख रिकॉर्ड ही स्कैन हो पाए थे। राजस्व विभाग को इससे पूर्व फरवरी 2018, मार्च 2019 और जून 2019 तक काम पूरा करने का लक्ष्य दिया गया था।

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