ढा़ई साल से ठप पड़ी राज्य सरकार की अपनी बिजली परियोजना पर काम अब तक बहाल नहीं हो पाया है। इस लंबे अरसे से जहां बिजली परियोजना की मशीनरी खराब होने के कगार पर पहुंच गई है, वहीं सरकार को अब तक करोड़ों की चपत लग चुकी है।
नौ मेगावाट क्षमता की सेवा हाइडिल परियोजना चरण तीन के ठप रहने से सरकार को नौ करोड़ का घाटा हो चुका है। ऐस में जल्द ही परियोजना को फिर से नहीं चलाया गया तो यह नुकसान कई गुना बढ़ सकता है।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2013 के मानसून सीजन के दौरान हट माश्का स्थित सेवा हाइडिल परियोजना चरण तीन की नहर से सटी सड़क धंस गई थी। इसके बाद परियोजना की नजर भी टूट गई।
नतीजतन परियोजना का काम ठप हो गया। नए सिरे से परियोजना को चलाने के लिए मरम्मत कार्य किया जाना था जिसके लिए बाकायदा सर्वे कर अनुमानित राशि का प्रस्ताव सरकार के पास मंजूरी के लिए भेजा गया जो अब तक अधर में ही लटका हुआ है।
नौ मैगावाट क्षमता की परियोजना से औसतन तीन से चार मेगावाट बिजली ही बनाई जा रही थी। लेकिन परियोजना के ठप होने से बिजली उत्पादन पूरी तरह से बंद पड़ा है, जिससे सरकार को नुकसान उठाना पड़ रहा है।
इस बाबत पूछे जाने पर एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि लंबे समय से ठप पड़ी परियोजना की मशीनरी खराब होने के कगार पर है। नहर की मरम्मत किए बिना परियोजना को बहाल करना मुमकिन नहीं है।