कश्मीर घाटी में क्षेत्रीय पार्टियों ने राज्य के विशेष दर्जे को चुनावी रैलियों का मुख्य मुद्दा बनाया है। नेकां, पीडीपी तथा पीपुल्स कांफ्रेंस तीनों ही अपनी चुनावी रैलियों में इस मुद्दे को जोर शोर से उठा रही है।
नेकां उपाध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला का कहना है कि चुनावी रैली में रियासत को संविधान में मिले विशेष दर्जे को मुद्दा बनाया जा रहा है। उन्होंने इस बात को खारिज किया कि लोकसभा में यहां के छह नुमाइंदे संविधान संशोधन के मुद्दे पर कुछ नहीं कर पाएंगे, उन्होंने कहा कि यह संख्या बल पर नहीं बल्कि तर्कों पर निर्भर करता है। यह जरूर है कि संख्या बल में हम कम जरूर हैं, लेकिन इससे ऊपर उठकर विशेष दर्जे को बचाने के लिए पहल की जाएगी। रियासत में होने वाली छोटी बातें अंतरराष्ट्रीय खबर बन जाती है, जबकि अन्य राज्यों में बड़ी बातों की अनदेखी कर दी जाती है। मेरा मानना है कि यहां के छह लोग अन्य राज्यों के 60 लोगों से अधिक कर सकेंगे।
पीडीपी ने अन्य पार्टियों की तुलना में ज्यादा हार्डलाइन अपना रखा है। पार्टी प्रमुख महबूबा मुफ्ती तो यहां तक कह चुकी हैं कि अनुच्छेद 370 या 35ए हटाने पर देश का जम्मू-कश्मीर से रिश्ता समाप्त हो जाएगा।
भाजपा के साथ गठबंधन सरकार में रही पीपुल्स कांफ्रेंस के अध्यक्ष सज्जाद गनी लोन का कहना है कि, अनुच्छेद 35ए यहां के लोगों के विश्वास तथा पहचान के साथ जुड़ा हुआ है। अपनी पहचान तथा गौरव के आगे लाभ व हानि का कोई मतलब नहीं है। क्या देश आर्थिक लाभ के लिए किसी विदेशी देश को इसकी संप्रभुता तथा पहचान के साथ खिलवाड़ करने की इजाजत दे सकता है। यह विशेष दर्जे वाला इकलौता राज्य नहीं है बल्कि उत्तर पूर्वी राज्य व हिमाचल प्रदेश में भी बाहरी लोगों को जमीन खरीदने से रोकने का कानून है।
कांग्रेस अध्यक्ष जीए मीर ने भी चुनावी रैलियों में कहा कि देश की कोई ताकत अनुच्छेद 370 व 35ए को नहीं हटा सकती है।