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आतंकवाद के कारण जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था को पहुंचा नुकसान: उमर अब्दुल्ला

Sat, 30 Mar 2019 12:12 AM IST
दुष्यंत शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, श्रीनगर

सार

  • जम्मू कश्मीर के विशेष दर्जे पर उमर ने की जेटली की आलोचना
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उमर अब्दुल्ला - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने जम्मू कश्मीर के विशेष दर्जे को लेकर अरुण जेटली के ब्लॉग पर उनकी आलोचना की। उन्होंने कहा कि राज्य की अर्थव्यवस्था को नुकसान बंदूक से पहुंचा है न कि विशेष दर्जे से। अगर इस पर कोई बहस होती है तो जम्मू कश्मीर के भारत के साथ हुए विलय पर भी सवाल खडे़ होंगे। 
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उमर अब्दुल्ला ने शुक्रवार को पत्रकारों से कहा कि जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जा और उसकी पहचान गंभीर खतरे में है। यह कोई नया खतरा नहीं है, बल्कि 2015 से है, जब भाजपा ने राज्य में गठबंधन सरकार बनाई थी। उन्होंने दावा किया कि विशेष दर्जे पर वीरवार को जेटली का एक ब्लॉग इस बात का सबूत है कि भाजपा और उसके नेता इस राज्य के बारे में जो सोच रहे हैं वह सही नहीं है। 

उन्होंने कहा कि हम अगर कुछ भी करें तब भी हम भाजपा के नेताओं की सोच को बदल नहीं सकते, लेकिन अगर उनकी ओर से सच्चाई पेश की जाती है तो शायद बहस की जा सकती थी, लेकिन सच्चाई को तोड़ मरोड़ कर पेश किया गया है। उसमें लिखा गया है कि जम्मू कश्मीर को उसके विशेष दर्जे के कारण नुकसान है और अगर यह विशेष दर्जा नहीं होता तो शायद हम एक रियासत के तौर पर और तरक्की कर गए होते। 
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उमर ने कहा कि जम्मू कश्मीर ही केवल एक रियासत नहीं है जिसे विशेष दर्जा प्राप्त है, और भी रियासतें हैं जिन्हें संविधान के तहत विशेष दर्जा प्राप्त है, लेकिन उनकी बात कोई नहीं करता, लेकिन जब हमला किया जाता है तो 35ए और 370 पर और जम्मू कश्मीर के विशेष दर्जे पर हमला होता है। उन्होंने कहा कि यह एक गलत धारणा फैलाई जा रही है कि ये दोनों अनुच्छेद सिर्फ कश्मीर के मुसलमानों को फायदा पहुंचा रहे हैं। 

तथ्य यह है कि राज्य को मिले विशेष दर्जे से न सिर्फ कश्मीर घाटी, बल्कि जम्मू और लद्दाख क्षेत्रों को भी संरक्षण प्राप्त है। यहां के लोग भी नहीं चाहते कि यह अनुच्छेद हटाया जाए। उमर ने कहा कि जेटली साहब की तरफ से यह बयान आना कि जम्मू कश्मीर में गुरबत 35ए की बदौलत है जो गलत है। उन्होंने कहा कि यहां होटल नहीं खुले क्योंकि यहां 35ए है। उमर ने कहा कि जेटली साहब शायद यह भूल गए आतंकवाद शुरू होने से पहले यहां इस तरह की कोई शिकायत नहीं थी।

उन्होंने कहा कि हमारी अर्थव्यवस्था को नुकसान बंदूक से, आतंकवाद से पहुंचा है। उमर ने कहा कि अगर 1989 से पहले देखें तो जम्मू कश्मीर को इस मुल्क के सबसे तेज तरक्की करने वाले राज्यों में गिना जाता था, यहां की जीडीपी बाकी रियासतों से मुकाबला करती थी। यहां हर इंडस्ट्रियल एस्टेट में जानी मानी कंपनियां थीं। 
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उमर ने कहा कि अनुच्छेद 35ए महाराजा के समय से है और यह आतंकवाद का प्रतिफल नहीं है। अगर यहां आज होटल आदि नहीं हैं तो वो 35ए की बदौलत नहीं बल्कि मोदी साहब के कारनामों की बदौलत है। उन्होंने कहा कि अगर मोदी ने इस रियासत को जिन हालात में 2014 में पहले यूपीए ने केंद्र के हवाले और नेशनल कांफ्रेंस ने पीडीपी-भाजपा के हवाले की थी वैसे ही रखा होता तो आज हम कहीं ज्यादा तरक्की कर गए होते। इसलिए हमारी गुरबत और परेशानियों को 35एके जिम्मे चढ़ाना गलत बात है। 

उमर ने यह भी कहा कि भाजपा और इसके नेतृत्व को इस मुद्दे पर फूंक-फूंक कर कदम रखना चाहिए और नियम एवं शर्तों पर फिर से बातचीत नहीं की जा सकती। नेकां उपाध्यक्ष ने कहा, ‘यदि आप अनुच्छेद 370 और ‘35 ए’ पर बहस करना चाहते हैं, तो मुझे माफ कर दीजिए...विलय (जम्मू कश्मीर के) पर भी सवाल उठेगा क्योंकि यह इन्हीं शर्तों पर हुआ था’। 

उमर ने कहा कि पीडीपी-भाजपा हुकूमत ने अपनी कुर्सी बचाने के लिए जिस अंदाज में 35ए को बचाने की कोशिश की जानी चाहिए थी वो नहीं की गई। सुप्रीम कोर्ट में सही तरीके से जवाब नहीं पेश किया गया। हम हुकूमत से बाहर होते हुए भी 35ए को बचाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। यह मजबूत केस है अगर इसे सही से बचाने की कोशिश की जाए। उमर ने यह भी कहा कि लोकसभा और विधानसभा चुनाव इस रियासत की पहचान को बचाने के लिए जरूरी होंगे। हमारे वोटरों को न सिर्फ भाजपा बल्कि उनके प्रॉक्सि से भी बचना होगा, जो भाजपा का एजेंडा लेकर मैदान में उतरे हुए हैं।

उमर ने कहा कि नेकां ने यह फैसला किया है कि हम चाहे सरकार में हों या नहीं, हम विशेष दर्जा बचाएंगे। समझौता मामले को लेकर उमर ने कहा कि एनआईए के विशेष न्यायाधीश ने खुद कहा कि अभियोजन पक्ष ने कुछ महत्वपूर्ण जानकारी को रोक के रखा जो दोषियों के खिलाफ कोई फैसला दे सकती थी। उमर ने कहा कि रेलवे ऐसे कप में चाय दे रहा है जिसके ‘मैं भी चौकीदार’ जैसे स्लोगन हैं और मैंने खुद देखा कि दो एयरलाइंस कंपनियां मोदी के फोटो बोर्डिंग पास पर छाप रही हैं, लेकिन चुनाव आयोग कोई भी कार्रवाई नहीं कर रहा है।
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