लोकसभा चुनाव की रणभेरी बज चुकी है। सभी दल जोर शोर से प्रत्याशियों को उतारने के साथ ही चुनाव जीतने की रणनीति बनाने में जुट गए हैं। लेकिन बात महिलाओं की करें तो उनकी महज दस्तक भर ही लोकसभा चुनावों में रही है। जम्मू-कश्मीर में महिला वोटरों की संख्या 37 लाख से अधिक होने के बावजूद अभी तक यहां उनका प्रतिनिधित्व एक फीसदी भी नहीं है।
राज्य के इतिहास के पन्नों पर नजर दौड़ाएं तो महज तीन ही महिलाएं हैं, जिन्होंने अपनी मौजूदगी दर्ज की। वह भी कश्मीर और लद्दाख सीट से। जम्मू संभाग आज तक महिलाओं के प्रतिनिधित्व को तरस रहा है। जम्मू संभाग में लोकसभा की जम्मू और उधमपुर दो सीटें हैं। कश्मीर में अनंतनाग, बारामुला और श्रीनगर तीन सीटें हैं, जबकि लद्दाख के खाते में बस एक ही सीट है।
लद्दाख से कांग्रेस ने 1977 में पार्वती देवी को मैदान में उतारा। नामग्याल के राजा से ब्याही गईं पार्वती ने अपने प्रतिद्वंद्वी को करीब तीन हजार मतों से मात दी थी। उधर, 1984 में अनंतनाग से नेशनल कांफ्रेंस यानी एनसी की अकबर जहां बेगम ने चुनाव में उतरकर प्रतिद्वंद्वी को पछाड़ा। अकबर जहां बेगम जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. फारूक अब्दुल्ला की मां और उमर अब्दुल्ला की दादी थीं।
अनंतनाग से ही 2004 में राज्य के मुख्यमंत्री रह चुके और पीडीपी अध्यक्ष मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी महबूबा मुफ्ती ने चुनाव जीता। इनके अलावा किसी भी दल ने महिलाओं को उम्मीदवार बनाने में दिलचस्पी नहीं दिखाई। अब देखना यह है कि इन चुनावों में क्या वाकई कोई पार्टी महिला सशक्तीकरण को हकीकत पर लाते हुए महिलाओं को चुनाव में उतारने में पहल करेगी या नहीं।