फारूक अब्दुल्ला ने श्रीनगर से भरा नामांकन
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पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने सोमवार को श्रीनगर लोकसभा सीट से नामांकन दाखिल किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि लोकसभा चुनाव में श्रीनगर से उनकी जीत सुनिश्चित है। हमारी लड़ाई उन ताकतों के खिलाफ है जो देश को धर्म के नाम पर बांटने की कोशिश में लगी हैं। वो लोग यह सिर्फ वोट हासिल करने के लिए कर रहे हैं। हमारे जवानों का इस्तेमाल भी वोट बटोरने के लिए किया जा रहा है।
श्रीनगर के जिला उपायुक्त कार्यालय में नामांकन दाखिल करने के बाद डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि सबसे बड़ी बात यह है कि हम लोग ‘सेक्युलर फोर्सेस’ को इकट्ठा करना चाहते हैं। वतन में एक बड़ा डर यह है कि लोगों को मजहब के नाम पर तोड़ा जा रहा है। जब संविधान नहीं बना था, हम इकट्ठे थे और सभी धर्म के लोगों ने इस वतन का गठन किया था।
अंग्रेजों को यहां से बाहर निकालना था, लेकिन आज जो हमारे यहां हो रहा है मजहब के नाम पर बांटा जा रहा है। मंदिर और मस्जिद की लड़ाई लड़ी जा रही है। इसके बजाए हम यह देखें कि किस तरह से लोगों का भला हो, देश का विकास हो। आज केवल सरकार इस पर जोर दे रही है कि किस तरह से चुनाव जीता जाए।
डॉ. फारूक ने कहा कि सरकार द्वारा नोटबंदी लागू कर कहा कि काला धन वापस लाया जाएगा, जीएसटी लागू किया, कहा सब ठीक हो जाएगा, लेकिन इस सबसे कोई फायदा नहीं मिला। हमारी लड़ाई इसलिए है कि किस तरह से लोगों को एक साथ लेकर आगे बढ़ा जाए। उन्होंने कहा कि हम तो उन जमातों को बाहर रखना चाहते हैं जो हमें मुसलमान और हिंदू के आधार पर बांटना चाहते हैं। मैं आज आंध्र प्रदेश जा रहा हूं ताकि हम एक साथ होकर एक सेक्युलर देश का गठन कर सकें।
डॉ. फारूक ने कहा कि हमे अफसोस तो इस बात का है कि आजकल की हुकूमत न बेकारी, न बदहाली के मुद्दे को उठा रही है। केवल पाकिस्तान पर किए गए हमले को एक मुद्दा बना कर वोट बटोरने की कोशिश की जा रही है। हमारे फौजी छत्तीसगढ़ में भी मारे गए, लेकिन प्रधानमंत्री वहां नहीं गए, यहां कई फौजी मारे जाते हैं क्या कभी कोई मंत्री आता है यहाँ। फौज इस्तेमाल चुनाव के लिए किया जा रहा है क्योंकि इनके पास दिखाने के लिए और कुछ है ही नहीं। फौज के अलावा और किसी मुद्दे को नहीं उठाया जा रहा।
पाकिस्तान में धर्म परिवर्तन के मुद्दे पर पूछे गए सवाल के जवाब में डॉ. फारूक ने कहा कि उस मुद्दे को भाजपा उठा रही है, लेकिन गुरुग्राम में मुस्लिम परिवार पर हुए हमले को लेकर किसी ने एक शब्द नहीं कहा। क्योंकि वो एक मुसलमान परिवार था और उनके लिए मुसलमान कोई मायने नहीं रखता। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान डे पर हमारे प्रधानमंत्री द्वारा इमरान खान को प्यार भरा संदेश भेजा जाता है और दूसरी तरफ लड़ाई की तैयारियां। यह प्यार है या लड़ाई समझ नहीं आता।
पीडीपी द्वारा उमर अब्दुल्ला पर 6 पावर प्रोजेक्टों को दिल्ली को सौंपने के लगाए गए आरोप को लेकर डॉ. फारूक ने कहा कि वे झूठ का सहारा न लें। राजनीतिक कार्यकर्ताओं को अपनी मूवमेंट में कमी को लेकर पूछे एक सवाल के जवाब में डॉ. फारूक ने कहा कि जो अल्लाह से नहीं डरता वो इन चीजों से डर जाएगा, जिंदा रखने वाला भी अल्लाह है और मारने वाला भी वही है। एक अन्य सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि अगर भाजपा को लगता है कि लड़ाई से चुनाव जीते जा सकते हैं तो वह तैयार रहें। वहां से भी एटम बम पड़ेंगे और यहां से भी, लाखों लोग मरेंगे और तबाही ही तबाही होगी। अगर लाशों पर इन्होंने चुनाव जीतने हैं तो बिस्मिल्ला।
नामांकन भरने से पहले डॉ. फारूक ने श्रीनगर में स्थित मकदूम साहिब की जियारत और दरगाह हजरतबल में हाजिरी दी। उन्होंने कहा कि मैंने दुआ मांगी कि अमन और शांति हो, फतेह दे, फिरकापरस्तों से निजात दे। मैंने हाथ उठा के दुआ मांगी कि जो ताकतें इस देश को धर्म के नाम पर बांटना चाहती हैं उन्हें कामयाबी न बख्शे। नामांकन भरने के समय पार्टी उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला, महासचिव अली मोहम्मद सागर के अलावा अब्दुल रहीम राथर, नासिर असलम वानी, तनवीर सादिक व अन्य नेता मौजूद रहे।