जम्मू में रैली को संबोधित करते पीएम मोदी
- फोटो : संजय गुप्ता
जम्मू की पहली चुनावी रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यानी ‘चौकीदार’ पूरे फार्म में दिखे। उन्होंने जम्मू से जुड़े सारे मुद्दों को उठाकर लोगों को जोड़ने की कोशिश की। पाकिस्तान और आतंक के पनाहगारों को निशाने पर लेते हुए दो टूक चेताया कि अब यह सब नहीं चलने वाला है। सीमा पार तथा देश के भीतर आतंकियों के साथियों को स्पष्ट चेतावनी दी कि अब एक भी कदम भारी पड़ेगा। एक शिक्षक की तरह उन्होंने पाकिस्तान, आतंक का साथ देने वालों के खिलाफ हो रही कार्रवाई पर रैली में मौजूद लोगों की राय ली और हामी भरवाई।
गुरुवार को मोदी लगभग 40 मिनट के भाषण में सबसे ज्यादा कांग्रेस के प्रति हमलावर दिखे। कांग्रेस का साथ देने वाली पार्टियां नेशनल कांफ्रेंस व पीडीपी पर भी निशाना साधा। कांग्रेस, नेकां व पीडीपी को जम्मू के हितों के साथ खिलवाड़ करने वाला बताकर वोट बैंक को सहेजने की कोशिश की। माता वैष्णो देवी तथा बाबा जित्तो का नाम लेकर और डोगरी में बोलकर उन्होंने अपने आपको जम्मू के लोगों से जोड़ा। यहां के लोगों को मां भारती की ढाल बताया।
जम्मू-कश्मीर के लोगों को रक्षक बताया जो दुश्मन के गोलों तथा साजिशों का सबसे पहले सामना करते हैं। इन लोगों के हौसलों को नमन किया। एलओसी व आईबी पर बंकरों के निर्माण, जम्मू-कश्मीर के संतुलित विकास, युवाओं को रोजगार, किसानों को सम्मान निधि, आयुष्मान भारत, उज्जवला योजना, गरीबों को पक्के मकान, आईआईटी, आईआईएम तथा जम्मू-पुंछ फोर लेन, आईबी के लोगों को तीन फीसदी आरक्षण, पहाड़ी भाषियों को तीन प्रतिशत व सवर्ण गरीबों को देश के अन्य राज्यों की तरह 10 फीसदी आरक्षण दिए जाने की बात कहकर यह जताने की कोशिश की कि भाजपा ही यहां के लोगों की सच्ची हितैषी है। रिफ्यूजियों तथा कश्मीरी पंडितों के दुख दर्द को भी बांटने की कोशिश की।