जम्मू-कश्मीर में भाजपा के नवनिर्वाचित सांसद
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लोकसभा चुनाव के नतीजे भारतीय जनता पार्टी के लिए रियासत में बदलाव की बयार का को स्थापित कर रहे हैं। भाजपा के समर्थकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। हाल ही में संपन्न हुई मतगणना में जम्मू कश्मीर में भाजपा को सबसे ज्यादा 46 फीसदी वोट शेयर हासिल हुआ है। हालांकि भाजपा ने वर्ष 2014 की ही तर्ज पर इसबार भी तीन सीटें ही जीती हैं।
वहीं नेशनल कांफ्रेंस को भी कश्मीर संभाग की तीन लोकसभा सीटों पर जीत हासिल हुई हैं। हैरानी भरी बात यह हैं कि नेशनल कांफ्रेंस का वोट शेयर भाजपा से काफी कम 7.89 फीसदी रहा है। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार भाजपा को 46.4 फीसदी वोट शेयर के साथ कुल 16,48,041 वोट हासिल हुए है। भाजपा को लोकसभा चुनाव में अब तक सबसे बेहतर प्रदर्शन भी रहा है। भाजपा को 27 विधानसभा क्षेत्रों में भारी बढ़त हासिल हुई है।
2014 की तुलना में 12 फीसदी वोट बढ़े
2014 के मुकाबले में भाजपा के वोट शेयर में 12 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। 2014 में भाजपा को जम्मू कश्मीर में 34.40 फीसदी वोट शेयर हासिल हुआ था।
कांग्रेस का वोट शेयर भी पांच फीसदी बढ़ा
कांग्रेस के वोट शेयर में पांच फीसदी की बढ़ोतरी तो हुई हैं लेकिन वह कोई सीट जीतने में कामयाब नहीं हो पाई। 2014 में कांग्रेस को 22.90 फीसदी वोट शेयर हासिल हुआ था जबकि इस बार करीब 27.90 फीसदी हो गया है।
पीडीपी की सबसे ज्यादा फजीहत, 18 फीसदी वोटर गंवाए
पीडीपी को केवल 2.4 फीसदी वोट शेयर हासिल हुआ है और वह कोई भी सीट हासिल नहीं कर पाई है। रियासत में 2014 के लोकसभा चुनाव में तीन लोकसभा सीटें जीतने वाली पीडीपी विधानसभा चुनाव में 28 सीटें जीतकर नंबर एक पार्टी बनी थी। लेकिन लोकसभा चुनाव नतीजों में पीडीपी को सबसे करारी हार का सामना करना पड़ा और वह एक भी सीट जीतने में कामयाब नहीं हो पाई। पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती तक अनंतनाग में तीसरे स्थान पर रहीं। 2014 लोकसभा चुनाव में पीडीपी को 20.50 फीसदी वोट शेयर हासिल हुआ था जो गिरकर केवल 2.4 फीसदी रह गया है।