प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (फाइल फोटो)
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पाकिस्तान से लगते जम्मू कश्मीर की छह लोकसभा सीटों के परिणाम पर बालाकोट स्ट्राइक, पुलवामा हमले, अनुच्छेद 35ए पर मचे घमासान तथा पाकिस्तान का असर दिखा। इन्हीं सब वजहों से जम्मू संभाग की दो सीटों पर भगवा खेमे ने भारी मतों के अंतर से जीत दर्ज की।
लोकसभा का पूरा चुनाव सभी पार्टियों नेकां, पीडीपी व कांग्रेस ने भाजपा के खिलाफ लड़ा। घाटी में अनुच्छेद 35ए को हटाए जाने संबंधी भाजपा के घोषणा पत्र को आधार बनाकर नेकां और पीडीपी दोनों ने मोर्चा खोल दिया। पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती तो अनुच्छेद 35ए हटने पर भारत के साथ विलय खत्म होने तक की धमकी देती नजर आईं। बालाकोट सर्जिकल स्ट्राइक और पुलवामा हमले पर भी नेकां और पीडीपी की ओर से सवाल उठाए जाते रहे।
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान की धमकी का भी चुनाव में असर दिखा। खासकर जम्मू संभाग में घाटी में चल रहे इन घटनाक्रमों का व्यापक असर दिखा और लोगों ने बंपर वोटिंग कर पाकिस्तान के साथ ही घाटी आधारित दलों को आइना दिखाया।
लद्दाख में संघ शासित प्रदेश का वायदा तथा विकास चुनाव पर हावी रहा। लेह में लोगों ने मोदी सरकार की ओर से किए गए विकास कार्यों को तवज्जो दी। पूर्व सांसद थुप्तसन चिवांग के पार्टी छोड़ने के बाद इस सीट को प्रतिष्ठा से जोड़ते हुए पार्टी ने लेह तथा कारगिल में अपने नेताओं को कैंप कराया।