जम्मू कश्मीर में राष्ट्रपति शासन का प्रस्ताव लोकसभा में शुक्रवार को ध्वनि मत से पारित हो गया। बाद में इस मामले पर चर्चा के दौरान गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार राज्य में विधानसभा चुनाव करवाने के लिए तैयार है। उन्होंने वर्तमान और पूर्व गवर्नर की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि वहां राज्यपाल शासन के बाद राष्ट्रपति शासन लगाने के अलावा कोई विकल्प ही नहीं बचा।
गृह मंत्री उस समय चौंक गए जब स्पीकर सुमित्रा महाजन ने प्रस्ताव पारित हो जाने के थोड़ी देर बाद इस मामले पर चर्चा की अनुमति दे दी। इस दौरान विपक्ष ने केंद्र सरकार पर राज्यपाल के जरिए जम्मू-कश्मीर में अपने अनुरूप फैसले कराने का आरोप लगाया। विपक्ष की ओर से शशि थरूर, फारुख अब्दुल्ला, भर्तृहरि महताब, सौगत राय, सुप्रिया सुले ने कहा कि वहां ऐसे समय राष्ट्रपति शासन लगाया गया, जब पीडीपी, नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस मिल कर सरकार बनाने के लिए तैयार हो गई थी।
विपक्ष ने इसे असंवैधानिक बताते हुए कहा कि बहुमत का फैसला सदन में होता है, न कि राज्यपाल निवास में। विपक्ष ने सरकार और भाजपा पर चुनाव से भागने का आरोप लगाते हुए जल्द से जल्द चुनाव कराने की मांग की।
जवाब में गृह मंत्री ने कहा कि चुनाव कराना चुनाव आयोग का काम है। जहां तक सरकार या भाजपा का सवाल है तो हम चुनाव के लिए तैयार हैं। हम भी सूबे में लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बहाल करने के लिए प्रतिबद्घ हैं। राजनाथ ने कहा कि पूर्ववर्ती राज्यपाल वोहरा ने राज्यपाल शासन के दौरान रिपोर्ट दी थी कि वहां कोई दल सरकार बनाने का इच्छुक नहीं है।
वर्तमान राज्यपाल ने भी ऐसी की सिफारिश की। ऐसे में सरकार के सामने राष्ट्रपति शासन के अलावा दूसरा कोई विकल्प नहीं था। राजनाथ ने कहा कि सरकार कश्मीर समस्या का शांतिपूर्ण समाधान चाहती है।