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क्वारंटीन के बाद लोगों को सकुशल घर पहुंचाने में रियासी प्रशासन विफल

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रियासी। देश सहित प्रदेश में जहां रोजाना कोरोना पॉजिटिव मामलों में अप्रत्याशित बढ़ोतरी हो रही है वहीं, लॉकडाउन में फंसे लोग क्वारंटीन के बाद भी सकुशल घर वापसी के लिए दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं। प्रदेश सहित जिला प्रशासन लोगों को हरसंभव सहायता प्रदान करने का दंभ भर रहा हो, लेकिन जमीन हकीकत कुछ और ही ब्यां कर रही। मौजूदा मामला दो सलालवासियाें का है जो कटड़ा में क्वारंटीन के बाद घर लिए निकले तो प्रशासन की ओर से मुहैया करवाई गई मिनी बस में, लेकिन चालक आधे रास्ते में उतार कर माहौर की ओर रवाना हो गया। इस कारण बीमार बच्चे के साथ उसकी मां कर चिलचिलाती धूप में दरबदर होना पड़ा है, जो प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगा रहा है।
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जानकारी के अनुसार कवारंटीन किए गए सलाल के तीन लोगों को रविवार को घर पहुंचने के लिए पूरा दिन परेशानी का सामना करना पड़ा। सलाल निवासी प्रिया रानी पत्नी परमानंद ने बताया कि मार्च की शुरुआत में वह अपने बीमार बच्चे पंकज को उपचार के लिए चंड़ीगढ़ लेकर गई थी। लॉकडाउन होने के बाद वह वहीं फंस गई। दो मई को वह कटड़ा पहुंची, जहां उन्हें क्वारंटीन किया गया। वहीं, अन्य सलाल निवासी संजीत सिंह ने बताया कि वह हिमाचल प्रदेश में काम करता है। लॉकडाउन में ढील मिलने पर बड़ी मुशकिल से सात मई को सांबा में पहुंचा, जहां उसे क्वारंटीन किया गया था। टेस्ट की रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद उसे कटड़ा भेज दिया गया। प्रिया और संजीत के अनुसार रविवार को कटड़ा प्रशासन ने क्वारंटीन के बाद एक मिनी बस में बिठा कर घर भेज दिया। मिनी बस में माहौर के भी कुछ लोग बैठे थे, जिन को भी कटड़ा में क्वारंटीन किया गया था।
सुबह 11 बजे मिनी बस चालक ने उन्हें रियासी में उतार दिया और कहा कि वह माहौर से वाया सलाल नहीं जाएगा। इसके लिए वह थनपाल के रास्ते जाएगा। बस अड्डे से वह पुराने अस्पताल में आ गए, जहां पर स्थानीय लोगों की मदद से उन्होंने प्रशासन के साथ संपर्क साधा और दोपहर बाद वाहन का प्रबंध किया गया।
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मदद के लिए आगे आए स्थानीय लोग
अस्पताल में चार घंटे से भी ज्यादा समय तक बैठे रहे तीनों लोगों के लिए चाय पानी की व्यवस्था वार्ड चार निवासी राकी मेंगी ने की। इसके साथ ही बीमार पंकज की सहायता के लिए आर्थिक मदद भी दी। स्थानीय निवासी विशाल शर्मा और चमन लाल ने कहा कि गैरजिम्मेदार मिनी बस चालक पर प्रशासन की तरफ से कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं, प्रशासन को भी लोगों को घर पहुंचाने के लिए पुख्ता प्रबंध करने चाहिए।
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